श्रीनगर । कश्मीर घाटी की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाली बर्फ ने ही घाटी में दहशत पैदा कर दी। पिछले दिनों से जारी बर्फवारी प्रभावित जनजीवन को सोमवार को एक और झटका लगा जब गुलमर्ग के खिलनमर्ग क्षेत्र में हुए हिमपात में सेना के हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल के कम से कम 16 जवानों की मौत हो गई है। सेना के प्रवक्ता कर्नल बरार के अनुसार जिस क्षेत्र में ये बर्फ की चट्टान गिरी थी वहां सेना की एक टुकडी मौजूद थी। उस टुकडी के 3 जवान अभी तक लापता हैं, जबकि 13 के शव बरामद किए जा चुके हैं। मरने वालों में एक अफसर लेफ्टिनेंट प्रतीक शामिल हैं।
प्रवक्ता के मुताबिक नियंत्रण रेखा के निकट इस कैंप में 400 जवान मौजूद थे। अचानक हुए 350 जवान बर्फ में फंस गए। इनमें से 70 सैनिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। बाहर निकाले गए 70 सैनिकों में से 20 सैनिकों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है। यह हादसा उस वक्त हुआ जब आर्मी ट्रेनिग हाई एल्टीट्यूड स्कूल के सैनिकों पर बर्फ की चट्टान गिर पडी। जम्मू-कश्मीर के पर्यटन मंत्री नासिर वानी के अनुसार इस हादसे में किसी भी पर्यटक के फंसे होने की कोई खबर नहीं है। बचावकार्य में सेना और पुलिस की मदद कर रहा है।
चिनाब से 32 को बचाया
जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी में आई अचानक बाढ के कारण फंसे 32 लोगों को सोमवार को सुरक्षित बचा लिया गया। रविवार शाम अचानक नदी का जलस्तर बढ गया जिसक कारण रियासी जिले में ट्रेक्टर ट्राली पर चालक समेत 32 लोग नदी में फंस गए थे।
जनजीवन अस्त व्यस्त
शनिवार से हो रही बर्फवारी से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। गुलमर्ग में काफी ज्यादा बर्फबारी हो रही है। भयंकर बर्फबारी के चलते इस जगह पर हेलिकॉप्टर भेजे जाना भी मुमकिन नहीं है। घटनास्थल से 25 किमी दूर तक बर्फ के चलते सडक जाम है।
हिमाचल में एक फीट बर्फबारी
हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले स्थानों पर पिछले चौबीस घंटों के दौरान औसत की तुलना में भारी हिमपात से जनजीवन प्रभावित हुआ है। हिमाचल के नारकंडा में लगभग एक फुट बर्फ गिरने से राष्ट्रीय राजमार्ग नंबर 21 बंद हो गया है। खडापत्थर में भी एक फुट बर्फ गिरी।
जबकि जम्मू कश्मीर के गुलमर्ग में हिमपात ने लोगों का जीना दूभर बना दिया है। गुलमर्ग में 33, कंजलवन में 55, द्रास सेक्टर में 25 सेमी और राज्य के अग्रिम क्षेत्रों में 57 सेमी हिमपात हुआ है।
13.5 हजार फीट ऊंचाई पर है कैंप
सेना के मुताबिक 13 हजार 500 फीट की ऊंचाई पर स्थित अस्थाई ट्रेनिग कैम्प में सैनिक सुबह आठ बजे ही पहुंचे थे। हाई एल्टीट्यूड स्कूल में सेना को खासतौर पर ऊंचाई वाले इलाकों में पहाडों पर चढने, स्नो स्कीईंग और बाकी चीजों की ट्रेनिग दी जाती है। रक्षा विभाग ने ये पुष्टी की है कि इस ट्रेनिग कैम्प में 350-400 सैनिक मौजूद थे।
कैसे होता है हिमस्खलन
ऊपर से नीचे बर्फ के तेज बहाव को हिमस्खलन कहते हैं। ऊंचे बर्फीले पहाडी इलाकों में बर्फवारी सबसे ज्यादा खतरनाक होती है। हिमस्खलन होने पर बर्फ के साथ हवा और पानी का तेज बहाव भी साथ में आ सकता है। हालांकि शुरूआत बर्फ के तेजी से खिसकने से ही होती है। इसकी प्रकृति भूस्खलन या चट्टान खिसकने से अलग होती है।
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