भोपाल। हजारों मील का सफर तय करके हर साल राजधानी में अक्टूबर में डेरा जमाने वाले प्र*वासी पक्षियों पर खतरा मंडरा रहा है। ये विदेशी मेहमान शिकारियों के निशाने पर हैं। पिछले दिनों कई प्रवासी पक्षियों के शिकार की खबरें सामने आई हैं।
गौरतलब है कि रविवार को बैरागढ के बेहरा घाट पर बिसलिंग टील्स, सीटी बतख प्रजाति के दो पक्षियों को मृत अवस्था में पाया गया। वन विभाग की उडनदस्ता टीम को देखकर मौके से शिकारी भाग खडे हुए। टीम ने मृत पक्षियों को अपने कब्जे में ले लिया और वन्यप्राणी अधिनियम के तहत अज्ञात लोगों पर प्रकरण दर्ज कर लिया है।
वन विहार में हुआ पोस्टमार्टम
मृत पक्षियों का पोस्टमार्टम सोमवार को वन विहार में किया गया। चिकित्सकों के अनुसार रिपोर्ट में पाया गया है कि पक्षियों की मौत गर्दन मरोडने के कारण हुई है। शहर में और आसपास दर्जन भर से भी अधिक प्राकृतिक स्थल प्रवासी पक्षियों को रास आते हैं। इनका आगमन हिमालय के तराई वाले सुदूर क्षेत्रों से होता है और मार्च तक ये यहां से विदा हो जाते हैं। ये प्रवासी पक्षी आकर्षण का केंद्र होते हैं। वन विहार में तो इनको देखने के लिए हजारों पक्षी प्रेमी अवलोकन शिविर में भाग लेते हैं। वन विभाग द्वारा इनकी सुरक्षा को लेकर कोई एहतियात नहीं बरती जा रही है।
कहां-कहां रहता हैं पक्षियों का डेरा
प्रवासी पक्षियों का राजधानी में मुख्यतः वन विहार ,केरवा डेम, घोडा पछाड, कालियासोत, कोलार डेम, शाहपुरा झील, प्रेमपुरा घाट, धंवंतरी पार्क, भदभदा, सुल्तानिया इंफ्रेट्री, एकंात पार्क, सारंगपाणी झील आदि स्थानों पर डेरा रहता है।
कौन-कौन से पक्षी आते है
विशलिंग टील्स, रूडी शेल्डक, ग्लासी आइबिस, ओरिएंटल डाटर, रेड क्रिस्टिड पोचार्ड, नकटा, लिटिल कार्मोरेट, पेटेंड स्टार्क, ओपल विल स्टार्क, कूट साउलर, सुरखाब, सहित 30 से 35 प्रजातियों के पक्षियों का जमावडा रहता है।
क्या कहते हैं पक्षी विशेषज्ञ भोपाल बड्र्स के मो. खालिक का कहना है कि प्रवासी पक्षियों को सुरक्षित करने जनजागरुकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है। साथ ही जिन स्थानों पर इन पक्षियों का जमावडा रहता है उन स्थानों पर निगरानी की जाए।
विभागीय अधिकारी का कहना
वन विहार के संचालक एसएस राजपूत का कहना है की ऐसे स्थलों पर जहां प्रवासी पक्षियों का डेरा रहता है उनको चिह्नित कर नजर रखी जाए तो शिकार की घटनाओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। हालंाकि विभाग द्वारा इस दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
उडनदस्ता टीम के प्रभारी एनडी शर्मा का कहना है कि जल्द ही इन शिकारियों को पकड लिया जाएगा। विभागीय टीम की खोजबीन जारी है।
इनका कहना
उडनदस्ता टीम नियमित रूप से पेट्रोलिंग करती है। ऐसे स्थानों पर नजर रखी जा रही है जहां पर प्रवासी पक्षियों का डेरा रहता है और पक्षियों के संरक्षण में काम कर रहीं संस्थाओं से भी विभाग समन्वय कर इस दिशा में काम कर रहा है। |