भोपाल । भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान धनराज पिल्लै ने विश्व कप खेल रही देश की टीम के चयन पर सवाल खडा करते हुए कहा कि टीम में अच्छे खिलाडियों को स्थान नहीं दिया गया। वहीं हॉकी में सुधार के लिए प्रोफेशनलिज्म की जरुरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बगैर इसके हिंदुस्तान की हॉकी को दुबारा उपर आना मुश्किल है।
एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में दिल में छिपी ढेरों पिडाओं को उजागर करते हुए राजीव खेल रत्न से सम्मानित हॉकी के तेजतर्रार खिलाडी धनराज पिल्लै ने कहा कि विश्व कप में आस्ट्रेलिया और स्पेन के खिलाफ मुकाबले के दौरान टीम में प्लानिंग की कमी दिखाई दी। दोनों मैचों में भारत 5-2 से हारा। यही स्थिति इंग्लैंड के विरुद्ध रही। विदेशी कोच के सवाल पर पिल्लै ने साफ कहा कि दद्दा ध्यानचंद के समय कौन सा विदेशी कोच था, तब भारत ने आठ बार ओलंपिक में विजेता बनने का गौरव हासिल किया। उन्होंने कहा कि जितनी तरजीह विदेशी कोच को ला कर दी जाती है, यदि इतना सब कुछ देश के प्रशिक्षक को दिया जाए तो परिणाम अच्छे होंगे। पिल्लै का कहना कि विदेशी कोच को सात-आठ लाख रुपए प्रतिमाह सिर्फ वेतन दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश में बहुत अच्छे खिलाडी हैं जिन्हें टीम में स्थान ही नहीं दिया गया। पिल्लै ने प्रभोत टिर्की, विमल लाकरा और दिलीप टिर्की आदि का नाम लेते हुए कहा कि ये सभी टीम में होने चाहिए थे।
हॉकी में राजनीति हॉवी है। फेडरेशन में कभी खिलाडियों को पदाधिकारी नहीं बनाया गया। हमेशा नॉन खिलाडी हीअध्यक्ष से लेकर सभी पदों पर रहे, जिन्हें हॉकी की समझ ही नहीं है।वर्तमान में जरूर हॉकी इंडिया की एडहोक कमेटी में सिर्फ जगवीर सिंह शामिल हैं। 2004 में 32 साल बाद एशिया कप जीतकर स्वदेश लौटी टीम के अपमान को याद करते हुए पिल्लै ने कहा पूरी टीम मुंबई एयरपोर्ट पर बैठी रही लेकिन फेडरेशन का कोई पदाधिकारी ने बात तक करने की जहमत नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने तो सम्मान दिया, लेकिन फेडरेशन ने बेइज्जती बहुत की। |