नई दिल्ली । देश में नीम-हकीमों की बढती संख्या को रोकने के लिए सरकार डॉक्टरों के पंजीकरण का समय-समय पर नवीनीकरण करने पर विचार कर रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि भारतीय चिकित्सा अधिनियम 1956 का संशोधन करने पर विचार किया जा रहा है ताकि भारतीय चिकित्सा परिषद को कुछ वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जा सके जिसका उपयोग वह भारतीय चिकित्सा रजिस्टर का समय समय पर नवीनीकरण करने में कर सके। भारतीय चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ केतन देसाई ने बताया कि एमसीआई ने इस प्रकार का प्रस्ताव वर्ष 1999 में सरकार को भेजा था जो उसके विचारधीन है। उन्होंने कहा कि डाक्टरों का पुनः पंजीकरण करने के अलावा एमसीआई यह भी चाहता है कि देश में हर पांच साल में डॉक्टरों का पुनर्मूल्यांकन हो। वर्तमान समय में कोई भी डॉक्टर अगर विदेश चला जाता है या फिर अपना पेशा छोड देता है तो उसका नाम पंजीकरण रजिस्टर से हटवाने के बारे में कोई प्रावधान नहीं है। मानवाधिकार आयोग ने हाल ही देश में नीम हकीमों की बढती संख्या में गहरी चिंता जाहिर की थी।
अभी तक यह है व्यवस्था
डॉक्टरी की डिग्री लेने के बाद अपना पेशा शुरू करने के लिए डॉक्टरों को अभी तक केवल एक बार संबंधित राज्य चिकित्सा परिषद में अपना पंजीकरण कराना पडता है और राज्य चिकित्सा परिषद ऐसे डाक्टरों की सूची भारतीय चिकित्सा परिषद एमसीआई को भेज देती है जो इनके नाम भारतीय चिकित्सा रजिस्टर में डाल देती है।
संख्या पता करना मुश्किल
वर्ष 1988 से अब तक सात लाख 70 हजार डॉक्टरों के नाम का पंजीकरण हो चुका है। इनमें से बडी संख्या में डॉक्टर देश छोडकर जा चुके हैं लेकिन उनका नाम नहीं हटा है जिसकी वजह से यह नहीं पता चल पाता कि एक समय में देश में कितने डाक्टर कार्यरत हैं। इस संबंध में एक और समस्या यह है कि एक ही डॉक्टर दो राज्य चिकित्सा परिषद में पंजीकृत है। |