भोपाल। हाल ही में जिला पंजीयक कार्यालय द्वारा इस वित्त वर्ष के लिए जमीनों की कीमतें तय की गई हैं। जो कलेक्ट्रेट की गाइडलाइन के आधार पर तय की गई हैं। इस संबंध में जिला पंजीयक ने जिला मूल्यांकन बोर्ड को प्रस्ताव भेजा है। यहां से प्रस्ताव अंतिम अनुमोदन के लिए केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजा जाएगा।
भेजे गए प्रस्ताव में कोलार रोड, एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्र, होशंगाबाद रोड, सीहोर रोड, रायसेन रोड की जमीनों की कीमतें हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मनमाने ढंग से तय की गई हैं। डेवलपमेंट वाले क्षेत्र और उनसे जुडी कॉलोनियों के रेट में भी काफी अंतर देखा जा रहा है। कुछ क्षेत्रों में जहां जमीनों के दामों में 50 से 100 फीसदी की भारी वृद्धि की है वहीं कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं, जहां पर यह दर 10 प्रतिशत से ऊपर नहीं बढ पाई है। पिछले तीन साल के आंकडे भी यही दर्शाते हैं कि शासन के आला अधिकारियों की मनमर्जी जमीनों के रेट पर हावी रहती हैं। वह एक ही क्षेत्र की जमीन की अलग-अलग दरें तय करते हैं, वहीं किसी क्षेत्र में डेवलपमेंट को आधार बनाकर जमीन के दाम दोगुने कर देते हैं।
राजस्व बढाना बना लक्ष्य
अप्रैल 09 से जनवरी 2010 में कोलार रोड, एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्र, होशंगाबाद रोड, सीहोर रोड, रायसेन रोड क्षेत्रों में कुल 35 हजार रजिस्ट्रीयां हुई हैं। जिसको देखते हुए इन क्षेत्रों के जमीनों के रेट 50 प्रतिशत तक बढाकर भेजे हैं जबकि विभागीय लोगों का मानना है कि यह बढोतरी केवल राजस्व बढाने व जिले को दिए टारगेट को पूरा करने के लिए की गई हैं। विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां विकास तेजी से हो रहा है।
आधार ही तय नहीं
वर्तमान में भेजे गए प्रस्ताव में भी पिछले सालों की तरह जमीन के दामों में वृद्धि का कोई आधार नहीं है। कहीं 10 फीसदी कहीं 20 तो कहीं जमीन के रेट 50-100 प्रतिशत बढा दिया गया है जो अच्छे अच्छों के गले नहीं उतरता। मिसरोद, नरेला शंकरी, व चूना भट्टी ऐसे क्षेत्र हैं जहां जमीन केदामों में 50 फीसदी तक वृद्धि की गई है। इसके वितरीत ईदगाह हिल्स क्षेत्र, गोदरमऊ, दामखेडा व हथाईखेडा जैसे क्षेत्र की जमीन के रेट केवल 10 से 20 फीसदी बढाए जाने का प्रस्ताव है। डेवलपमेंट, अधिक प्लाटों की रजिस्ट्री और राजस्व वसूली का टारगेट पूरा करने के नाम पर मनमाने तरीके से रेट थोप दिए जाते हैं।
विभागीय अधिकारियों की मनमर्जीः
राजस्व विभाग, नजूल और पटवारियों द्वारा क्षेत्र की जमीनों के रेट के आधार पर आगामी वर्ष के प्रस्तावित रेट तय किए जाते हैं। यह कर्मचारी अपनी मनमर्जी के आधार पर रेट बताते हैं उधर शासन की कोई गाइड लाइन भी नहीं है जिसके चलते यह तय हो सके कि जमीन की कीमतें कितने फीसदी बढाई जाएं।
जमीन की कीमत आसमान पर
साल दर साल बिना तकनीकी परीक्षण के बढा दी जाती हैं जमीनों की कीमत
कहीं 20 तो कहीं 100 प्रतिशत तक बढते हैं दाम
राजस्व वसूली और टारगेट पूरा करने बढाई जाती हैं कीमत
समिति में जनता व कॉलोनाइजरों की हिस्सेदारी नहीं
नाम के लिए मांगे जाते हैं सुझाव
रेट बढाने का कोई मानक आधार तय नहीं
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