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आईपीसी को सेंटर बनाने का विवाद गरमाया
On 3/9/2010 7:02:56 PM

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भोपाल। बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज को परीक्षा सेंटर से हटाने का मामला एक बार फिर तूल पकड लिया है। कॉलेज संचालक एवं कांग्रेस नेता आरिफ मसूद के समर्थकों और विद्यार्थियों ने सोमवार को कुलपति पीके मिश्रा से मुलाकात की और अपनी समस्या से अवगत कराया। साथ ही इस विवि प्रशासन द्वारा लिया गए निर्णय पर तत्काल रोक लगाने के लिए दबाव बनाया। फिलहाल बाग सेवनिया पुलिस के संरक्षण में विवि प्रशासन ने पूरे मसले के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है, जो गुरुवार को जांच रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज ने जिला कोर्ट में याचिका दायर कर दी गई है और मंगलवार को अरुण शर्मा के पैनल द्वारा सुनवाई की जाएगी।

विवि के प्रशासनिक भवन में दोपहर बाद आरिफ मसूद के समर्थक और विद्यार्थियों के पहुंचते ही हडकंप मच गया है और विवि ने तत्काल सुरक्षा के लिए पुलिस बुला ली। इसके बाद कुलपति पीके मिश्रा ने इन विद्यार्थियों को केबिन में बुलाया। जहां विद्यार्थियों ने बताया कि पुराने भोपाल से एमवीएम कॉलेज के लिए टैक्सी या अन्य यातायात की सुविधा नहीं है, इस कारण से सैफिया कॉलेज स्थित परीक्षा सेंटर इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज को बनाया जाए। इस पर कुलपति ने पहले उन्हें समझाया कि आपकी जानकारी दुरुस्त नहीं है, पुराने शहर से एमवीएम कॉलेज में आने के लिए पर्याप्त साधन है। इसको लेकर कुलपति और विद्यार्थियों के बीच विवाद छिड गया । उसी दौरान विद्यार्थियों ने तत्काल निर्णय पर कहा कि परीक्षा की तिथि आगे बढाई जाए। कुलपति मिश्रा द्वारा उनके विकल्प पर अपनी सहमति नहीं दी। साढे चार घंटे जद्दोजहद के बाद कुलपति ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाने का निर्णय लिया और इसकी रिपोर्ट गुरुवार को सौंपने के निर्देश दिए। जिससे विद्यार्थी संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने प्रशासनिक भवन के सामने खडे होकर आरिफ अकील और कुलपति के खिलाफ नारेबाजी की।

परीक्षा आगे बढाने की मांग

एनएसयूआई ने भी सोमवार को इस पूरे मसले पर कुलपति को ज्ञापन सौंपा और कहा कि कोड 28 के तहत कई कॉलेज परीक्षा केंद्र की मानक को पूरा नहीं कर रहे हैं इसलिए इन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र निरस्त कर देना चाहिए और परीक्षा की तिथि आगे बढाई जाए। इस पूरे विवाद पर उन्होंने बोनीफाई कॉलेज को लेकर भी परीक्षा केंद्र निरस्त करने की बात कही। साथ ही आईपीसी कॉलेज को लेकर विवि द्वारा निर्णय को न्यायसंगत नहं बताया।

कमेटी 11 को सौंपेगी रिपोर्ट

इस पूरे मसले का हल करने के लिए विवि प्रशासन ने कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी में राजपाल सिंह, संतोष कुमार श्रीवास्तव, मोती सिंह और प्रो. नासिर अली को शामिल किया है। यह अपनी रिपोर्ट गुरुवार को सौंपेंगे।

जांच समिति गठित

बरकतउल्ला विश्व विद्यालय ने जांच के लिये चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। पूर्व कुलपति प्रोफेसर संतोष कुमार श्रीवास्तव, सेवानिवृत आईएएस मोतीसिंह, सेवा निवृत प्राचार्य प्रो. नासिर अली और प्रो. राजपाल सिंह इसके सदस्य रहेंगे। कमेटी से 11 मार्च तक रिपोर्ट देने को कहा है।

कुलपति का कहना

जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। गुरुवार को रिपोर्ट प्रस्तुत होगी। कार्यपरिषद के गठन नहीं होने के कुलपति के पास अधिकार नहीं होते हैं, इसलिए फैसला लेने में विलंब होगा। परीक्षा स्थगित करने से विवि प्रशासन सहित अन्य कॉलेजों को आर्थिक नुकसान उठाना पडेगा। यह निर्णय उचित नहीं है।

विवाद में क्या-क्या बातें हुईं

कॉलेज के विद्यार्थियों ने यह आरोप लगाए कि विवि के इस निर्णय से अल्पसंख्यक जाति को नजरअंदाज करने का प्रयास किया जा रहा है, अन्यथा आईपीसी कॉलेज को परीक्षा सेंटर से नहीं हटाया जाता

विद्यार्थियों ने विवि पर यह आरोप भी लगाया कि शिकायत की बिना जांच कराए हुए विवि प्रशासन ने किस आधार पर परीक्षा सेंटर निरस्त कर दिया? वहीं अब हम इसकी शिकायत कर रहे हैं, तो शीघ्र फैसला क्यों नहीं लिया जा रहा, क्या विवि प्रशासन दोहरी भूमिका निभाई जा रही है?

एक शैक्षाणिक संस्थान पर राजनीतिक दबाव क्यों, जब बीयू की कार्यपरिषद ने आईपीसी कॉलेज को परीक्षा सेंटर बनाया था, तो निरस्त करने का अधिकार भी उन्हीं को मिलना चाहिए

आईपीसी के अलावा बोनीफाई सहित अन्य कॉलेज भी कोड 28 के मानक को पूरा नहीं करते हैं, तो फिर इन कॉलेजों को किस आधार पर परीक्षा सेंटर बनाया गया, शिकायत के बावजूद ये परीक्षा केंद्र निरस्त क्यों नहीं किए जा रहे?

जांच रिपोर्ट आने तक परीक्षा स्थगित क्यों नहीं की जा रही?

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