भोपाल । ट्रैफिक पुलिस के दो डीएसपी सहित आधा दर्जन निरीक्षक और इतने ही उप निरीक्षकों ने एक वर्ष में विभाग को लखपति बनाया। ये बात और है कि ऐसा करने उन्होंने ट्रैफिक सुधार पर ध्यान देने के बजाए चालान काटने पर ज्यादा ध्यान दिया है। हाल ही में एक रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि ट्रैफिक पुलिस सिर्फ चालान काटने में व्यस्त है, न कि उनका ध्यान यातायात सुधार में है।
एक ओर शासन और प्रशासन शहर में बढ रहे अतिक्रमण और बिगडती यातायात व्यवस्था को सुधारने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ट्रैफिक पुलिस के अफसर यातायात सुधार में ध्यान देने के बजाए आम जनता की जेब में डाका डाल कर विभाग के लिए लाखों की कमाई करने में व्यस्त हैं। ट्रैफिक पुलिस ने वर्ष 09 में 93 हजार सात सौ 58 चालान काट कर 86 लाख 73 हजार 700 रुपए की कमाई की है।
रिकार्ड टूटेगा ः इस साल के शुरुआती दो माह में हुई ट्रैफिक पुलिस की कमाई पर गौर करें तो कमाई का आंकडा 15 लाख 94 हजार छह सौ रुपए है। अनुमान है कि साल पूरा होने पर कमाई का यह आंकडा डेढ करोड के पार पहुंच जाएगा। ट्रैफिक पुलिस के कमाऊ पूतों द्वारा काटे जा रहे चालान को ग्राफ पिछले कई सालों का रिकार्ड तोड सकता है।
अफसरों का यातायात व्यवस्था पर ध्यान न देकर सिर्फ चालान काटने आए दिन आम लोग दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं, लेकिन विभाग उन्हीं से वसूली गई रकम यातायात सुधार के लिए नहीं लगा रही है। |