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अंगरक्षक पाने करनी होगी जेब ढीली
On 3/9/2010 7:04:50 PM

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भोपाल। गनमैन साथ रखना रसूखदारों के लिए अब स्टेटस सिंबल नहीं रहेगा, क्योंकि शासन ने सुरक्षा श्रेणी में नहीं आने वाले व्यक्तिय के लिए सशुल्क गनमैन व्यवस्था लागू कर दी है और जो शुल्क निर्धारण किया है, उसका भुगतान करना आसान नहीं होगा। गनमैन का शुल्क पचास हजार रुपए प्रतिमाह होगा और इसके लिए तीन माह की अग्रिम राशि डेढ लाख रुपए जमा करने पर ही गनमैन मिल पाएगा। इस तरह गनमैन का शुल्क छह लाख रुपए सालाना होगा।

हवलदार के साठ हजार

राज्य सुरक्षा सलाहकार समिति की बैठक में अंगरक्षक व्यवस्था की समीक्षा के उपरांत शासन ने एक बार फिर से सशुल्क गनमैन व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। जिन व्यक्तियों को सुरक्षा की पात्रता नहीं है और उन्हें किसी तरह का खतरा नहीं है, ऐसे व्यक्तियों को अब अंगरक्षक लेने पर शुल्क देना पडेगा। इनमें जनप्रतिनिधि से लेकर निजी क्षेत्रों से जुडे व्यक्ति शामिल रहेंगे।

बतौर सिपाही के प्रतिमाह पचास हजार रुपए देने होंगे, जबकि गनमैन के रूप में प्रधान आरक्षक को लिया जाता है तो उसका शुल्क साठ हजार रुपए प्रतिमाह होगा और एक लाख 80 हजार रुपए अग्रिम जमा करना होगा। यह राशि जिला मुख्यालयों पर जमा कराई जाएगी, इसके बाद पुलिस मुख्यालय के आदेश पर गनमैन दिए जाएंगे। अग्रिम राशि जमा करने के बाद हर माह निर्धारित राशि जमा करना होगी।

पहले भी लागू हो चुकी है नीति

कांग्रेस शासनकाल में वर्ष 2001 में यह व्यवस्था लागू की गई थी। तब शुल्क की राशि गनमैन के वेतन-भत्ते के बराबर ली जाती थी और उस समय भी तीन माह की राशि अग्रिम ली जाती थी। तब गिने-चुने जनप्रतिनिधियों ने ही शुल्क जमा कर गनमैन लिए थे, जबकि बडी संख्या में गनमैनों की वापसी हो गई थी।

इनके हटेंगे अंगरक्षक

शासन के निर्णय के बाद फिलहाल करीब डेढ सौ गनमैन वापस हो रहे ह, लेकिन भविष्य में संख्या तीन सौ से ऊपर पहुंच जाएगी। फिलहाल जिन व्यक्तियों से गनमैनों की वापसी की जाना है, उनमें निगम-मंडलों के अध्यक्ष, महापौर, राजनैतिक दलों के प्रदेश तथा जिलास्तर के पदाधिकारी, जिन्हें सुरक्षा की पात्रता नहीं है। इसके बाद सांसद, विधायकों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी। पुलिस मुख्यालय न सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए ह कि ऐसे व्यक्तियों से गनमैन वापस कराए जाएं। एडी तथा नक्सलाइट जोन में जिन जनप्रतिनिधियों को खतरा है, उनके गनमैन यथावत रखे जा रहे ह, लेकिन इस संबंध में पुलिस अधीक्षकों से रिपोर्ट तलब की गई है।

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