अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एक महिला फिल्म डायरेक्टर को ऑस्कर मिलना सचमुच एक बडी उपलब्धि है। यह पहला मौका है, जब किसी महिला को सर्वश्रेष्ठ डायरेक्टर और सर्वश्रेष्ठ फिल्म-श्रेणी में दी जाने वाली ऑस्कर की काली मूरत को लेने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। कैथरिन बिगेलो की फिल्म ‘द हर्ट लॉकर’ को 82वें ऑस्कर समारोह की कुल नौ श्रेणियों के लिए नामांकित किया गया था, जिनमें से छह में इसने पुरस्कार बटोरे। इराक में अमेरिकी फौज के एक बम-निरोधक दस्ते के इर्द-गिर्द बनी इस फिल्म में बम निष्क्रिय करने से जुडे खतरों, इसके इर्द-गिर्द होने वाले तनाव और युद्धभूमि का वर्णन करने वाले दृश्य इस फिल्म को यादगार बनाते हैं।
लगभग साठ साल की कैथरिन हालीवुड की फिल्म इंडस्ट्री में लंबे अरसे से सक्रिय हैं, लेकिन विडंबना यह रही कि जिन कंपनियों का अमेरिकी फिल्म इंडस्ट्री पर दबदबा है, उनमें से एक ने भी उन्हें अपनी किसी फिल्म का निर्देशन करने लायक नहीं माना। ‘द हर्ट लॉकर’ 2008 में बिना किसी कंपनी की छत्रछाया के बनाई गई एक स्वतंत्र फिल्म है। वेनिस फिल्म समारोह में इस फिल्म को प्रशंसा मिलने के बाद जानी-मानी फिल्म वितरण कंपनी वार्नर ब्रदर्स ने इसके केवल इटली में वितरण के अधिकार खरीदे थे, जबकि टोरंटो फिल्म महोत्सव में सराहना मिलने के बाद सम्मिट एंटरटेनमेंट कंपनी ने इसे अमेरिका में दिखाने का जिम्मा लिया था। इसी कंपनी ने यह फिल्म कनाडा में भी वितरित की थी। यूरोप के अन्य देशों में इस फिल्म को वितरक नहीं मिले थे, क्योंकि इस पर हालीवुड की किसी नामचीन फिल्म निर्माण कंपनी का ठप्पा नहीं लगा था। यानी, आज अगर कैथरिन बिगेलो को ऑस्कर मिला है, तो यह उनकी प्रतिभा और संकल्पशक्ति का ही सुफल है। वैसे अमेरिका संसारभर के नारीवादी आंदोलनों का गढ रहा है। अतीत चाहे जैसा भी हो, लेकिन आज के अमेरिकी समाज में महिला-पुरुष के बीच भेद जरा मुश्किल से ही नजर आने वाली चीज है। ऐसे में यह कहना शायद ठीक नहीं होगा कि वहां की फिल्म कंपनियां किसी सामंती-पुरुषवादी मानसिकता के तहत महिला डायरेक्टरों को आगे आने का मौका नहीं देतीं, लेकिन मामला जब पूंजी का होता है, तो वहां भी महिलाओं पर दांव कम ही लगाया जाता है। मसलन-मामला जब अवतार जैसी कोई फिल्म बनाने के लिए 50 करोड डालर किसी एक व्यक्ति के हाथों में सौंप देने का होता है, तो सबसे साहसी फाइनेंसर भी इसके लिए किसी महिला की जगह किसी पुरुष डायरेक्टर पर ही भरोसा करता है। कैथरिन बिगेलो भी अपनी फिल्म के लिए आर्थिक संकट से जूझी थीं।
उन्होंने ‘द हर्ट लॉकर’ में अपनी पूरी ऊर्जा झोंककर पुरुष वर्चस्व के इस ज्यादा महीन रूप की जडों पर करारी चोट की है। यह पुरुष वर्चस्व का महीन रूप ही है कि फाइनेंसर महिला डायरेक्टरों की तुलना में पुरुषों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। हालांकि, अतीत में कैथरिन बिगेलो यह भी कह चुकी हैं कि वे सिर्फ अपनी कला के माध्यम की सीमाओं का विस्तार ही करना चाहती हैं, स्त्री-पुरुष भूमिकाओं या फिल्म विधा से जुडी परंपराओं में बदलाव लाना उनकी चिंता का विषय नहीं है। बहरहाल, उनका यह कहना भी बिलकुल ठीक है। सीमाएं तोडने का काम अकसर वे ही लोग करते हैं, जो अपनी ऊर्जा नारेबाजी में नहीं, बल्कि उस काम में लगाते हैं, जो उनके दिल के सबसे ज्यादा करीब होता है।
पूनम श्रीमाली |