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अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा भारत के प्रसिद्ध क्रिकेटर कपिल देव को ‘हॉल ऑफ फेम’ में शामिल करना इस भारतीय खिलाडी की महानता को तो दर्शाता ही है, भारत के लिए भी यह गर्व का विषय है। यह गर्व का विषय इसलिए है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीयों के साथ सतैला व्यवहार ही किया जाता है। बहरहाल, ‘हॉल ऑफ फेम’ फेडरेशन ऑफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर्स एसोशिएशन के सहयोग से दिया जाने वाला वह सम्मान होता है, जो महान खिलाडियों को दिया जाता है। कपिल देव निश्चित ही इस सम्मान के हकदार थे। उन्होंने क्रिकेट में उस समय सिक्का जमाया था, जब पाकिस्तान के इमरान खान, इंग्लैंड के इयान बाथम और न्यूजीलैंड के रिचर्ड हैडली अपना जलवा बिखेर रहे थे। कपिल देव न केवल एक अच्छे आलराउंडर थे, बल्कि उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने एकमात्र विश्व कप भी जीता था।
1983 के विश्व कप के एक लीग मैच में चार विकेट गिरने के बाद विषम परिस्थितियों में उन्होंने नाबाद 175 रनों की बेहतरीन पारी खेलकर टीम इंडिया को फाइनल में पहुंचाया था। इतना ही नहीं, वे अपने 16 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कैरियर में 131 टेस्ट मैचों में 443 विकेट झटकने वाले पहले भारतीय गेंदबाज भी हैं। उन्होंने 225 वनडे में भी 253 विकेट लिए हैं, तो वे बल्लेबाजी में भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने 131 टेस्टों में आठ शतकों व 27 अर्द्धशतकों की मदद से 5248 और 225 वनडे में 31.05 के औसत से 3783 रन बनाए हैं। हालांकि, भारत के दो और क्रिकेटरों, सुनील गावस्कर और बिशन सिंह बेदी को भी इस सम्मान के लिए सूची में शामिल किया गया है, पर उन्हें अभी यह मिला नहीं है, लेकिन कपिल देव को यह सम्मान मिल गया, तो यह भी भारत का गौरव बढाने वाली एक महत्वपूर्ण घटना ही है। |