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कर्मचारी आंदोलन के आगे झुके कुलपति
On 3/10/2010 10:59:29 PM

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ग्वालियर। जीवाजी विश्वविद्यालय में बुधवार को दबाववश कर्मचारियों की डीपीसी आयोजित की गई। कर्मचारियों के आंदोलन के आगे कुलपति को झुकना पडा और दोबारा डीसीपी की बैठक आयोजित करनी पडी। बताया यह जा रहा है कि डीपीसी में नियमों की धज्जियां उडाकर कुछ कर्मचारियों को गलत तरीके से पदोन्नति का लाभ देने का प्रयास किया गया था। लेकिन जब अन्य कर्मचारियों का नंबर आया तो कुलपति ने यह बैठक स्थगित कर दी। जब कर्मचारियों को इसका पता चला कि अन्य लोगों को डीपीसी में शामिल नहीं किया गया है, तो उन्होंने धरना देकर आंदोलन करना शुरू कर दिया।

जीवाजी विश्वविद्यालय के कुछ कर्मचारियों को पदोन्नत करने के मामले में डीपीसी की बैठक आयोजित की गई। जिसमें नियमों की धज्जियां उडाते हुए कुछ कर्मचारियों को इसका लाभ देने का प्रयास किया गया। लेकिन अन्य कर्मचारियों के मामले को इसमें शामिल नहीं किया गया और डीपीसी स्थगित कर दी गई। बीच में डीपीसी स्थगित होने की वजह से अन्य कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल सका। इस वजह से कर्मचारी एकत्रित होकर धरने पर बैठ गए और दोबारा डीपीसी की बैठक आयोजित करने की मांग करने लगे। कर्मचारियों के आंदोलन के आगे कुलपति को झुकना पडा और फिर से डीपीसी आयोजित की गई। बताया जा रहा है कि देर रात तक डीपीसी चलती रही। जब तक डीपीसी समाप्त नहीं हुई तब तक कर्मचारी धरने पर बैठे रहे।

देर रात तक चला धरना प्रदर्शनः कुलपति प्रो. एम किदवई द्वारा डीपीसी की बैठक स्थगित करने और डीपीसी में अन्य कर्मचारियों की पदोन्नति नहीं करने के विरोध में करीब 4.30 बजे सभी कर्मचारी मुख्य भवन के बाहर धरने पर बैठ गए। कर्मचारी यह मांग करने लगे कि नियमों के तहत डीपीसी आयोजित की जाए और उन्हीं लोगों को पदोन्नति का लाभ दिया जाए, जो इसके हकदार हैं। आंदोलन के जोर पकडने पर कुलपति ने तत्काल दोबारा डीपीसी की बैठक आयोजित की और अन्य कर्मचारियों के मामले में चर्चा शुरू हो गई। देर रात तक कर्मचारी धरने पर बैठे रहे।

हाईकोर्ट ने दिया था नोटिसः जानकारी के मुताबिक जीविवि के कार्यालय सहायक दामोदर शर्मा की पदोन्नति कनिष्ठ अधीक्षक के पद पर होनी थी, लेकिन पिछले माह एक साजिश के तहत डीपीसी नहीं आयोजित की गई और वह सेवानिवृत्त हो गए। उसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने विवि को यह आदेश दिया है कि विवि जो भी पदोन्नति करेगा, वह याचिका के निर्णय के अधीन रहेगी। साथ ही कोई भी पदोन्नति इस निर्णय के पहले मान्य नहीं रहेगी। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी आज डीपीसी आयोजित की गई और विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपने लोगों को लाभ पहुंचाया।

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