| | 482 स्वर्ण मुद्राएं | | | |
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भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किए गए प्रयासों के परिणामस्वरूप बुरहानपुर में सात वर्ष पहले खुदाई में निकलीं और जूनागढ (गुजरात) चली गई 482 ऐतिहासिक स्वर्ण मुद्राएं प्रदेश में वापस लौट आई ह। इन्हें भोपाल के राज्य संग्र*हालय में रखा गया है। पुरातात्विक दृष्टि से इन पांच किलो दो सौ ग्राम वजनी बहुमूल्य स्वर्ण मुद्राओं का बाजार मूल्य लगभग 89 लाख रुपए आंका गया है।
यह जानकारी संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि 482 में से 467 स्वर्ण मुद्राएं (सिक्के) मुगल सम्राटों के समय (काल) के ह। इन मुद्राओं में सात पुर्तगाली, चार नीदरलड की प्राचीन मुद्राएं भी हैं। शेष आठ मुद्राओं में से सात सिक्कों के छोटे बटन ह जिन पर कोई पुरा अभिलेख अंकित नहीं ह जबकि एक सिक्का गलाकर बनाई गई छोटी राड के रूप में मिला है।
जहांगीर से लेकर औरंगजेब तक
संस्कृति मंत्री ने बताया कि बुरहानपुर में मिलीं 482 स्वर्णमुद्राओं में से 467 मुगलकालीन सिक्के ह। इनमें सन 1605 से 1627 तक मुगल शासक रहे जहांगीर के चार, सन 1628 से 1658 तक शासक रहे शाहजहां के ततीस और सन 1658 से 1707 तक शासन करने वाले औरंगजेब के 430 स्वर्ण सिक्के ह। प्रारंभिक अध्ययन के मुताबिक इन्हें सूरत, औरंगाबाद, शोलापुर, बुरहानपुर, मुलतान, अकबराबाद, काबुल, अहमदनगर तथा जाफराबाद टकसालों में ढाला गया था।
खुदाई में मिली थीं स्वर्णमुद्राएं
गुजरात से जो मुगलकालीन स्वर्ण मुद्राएं भोपाल लाई गई ह वे सन 2003 में बुरहानपुर जिले के शिकारपुरा क्षेत्र में सविता रानी पति मुकेश के निवास से खुदाई के दौरान मिली थीं। जिन्हें सविता रानी ने जूनागढ (गुजरात) के थाना गिर गधाडा क्षेत्र में रहने वाली अपनी पुत्री को दे दिया। पुत्री ने गुप्त धन अपने पास नहीं रखने की मंशा से पुलिस थाने में सूचित किया और इच्छा जताई कि स्वर्णमुद्राएं सोमनाथ मंदिर में दानस्वरूप भेंट कर दी जाएं।
यूं लौटीं वापस मध्यप्रदेश
सूचना के बाद स्वर्ण मुद्राएं गिर गधाडा पुलिस ने अपनी अभिरक्षा में लेकर जिला मजिस्ट्रेट , जूनागढ में प्रतिवेदन पंजीबद्ध कराया। जिन्होंने तफ्तीश के बाद 10 अगस्त 2007 को उक्त मुद्राएं मध्यप्रदेश की निधि होने का आदेश पारित किया। जिला मजिस्ट्रेट, बुरहानपुर ने उक्त संबंध में शासन को सूचित करते हुए स्वर्णमुद्राएं मध्यप्रदेश शासन की अभिरक्षा में लेने का अनुरोध किया था, जिसके बाद आयुक्त पुरातत्व द्वारा गठित टीम ने 17 फरवरी, 2010 को जूनागढ प्रस्थान किया था। टीम द्वारा मुद्राओं का मूल्यांकन कराने पर इनका अनुमानित मूल्य 88 लाख 73 हजार 886 रुपए आंका गया। 90 लाख का यात्रा बीमा कराकर इन्हें 23 फरवरी, 2010 को भोपाल लाया गया और तभी से ये स्वर्ण मुद्राएं राज्य संग्र*हालय में रखी ह। पहले भी मिल चुकी है कामयाबी मध्यप्रदेश सरकार को बहुमूल्य पुरातात्विक संपदा लाने में तीसरी बार बडी कामयाबी मिली है। इससे पूर्व सन 1968 में महाराज छत्रसाल संग्र*हालय, धुवेला (छतरपुर) से चोरी गई ‘कृष्ण जन्म’ तथा सन 2000 में वराह मंदिर, मंदसौर से चुराई गई ‘वराह अवतार’ प्रतिमाएं अमेरिका से वापस लाई जा चुकी ह। |
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