|
भोपाल। महंगाई के इस दौर में यदि आपको कोई दस रुपए प्रतिमाह की दर से मकान का किराया चुकाने की बात करे तो शायद आप सहज यकीन नही करेगें , लेकिन पिछले दस सालों से कब्जा जमाए बैठे मध्य प्रदेश लॉजिस्टिक एवं वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के अधिकारी-कर्मचारी इसी दर से किराया चुका रहे हैं। निगम को अब तक लाखों रुपए का चूना लगने वाले इस मामले में छोटे कर्मचारी से लेकर बडे अधिकारी तक शामिल हैं।
वेयरहाउसिंग कार्पोरेशन के पास आई एवं एफ श्रेणी दोनों मिलाकर कुल 68 मकान हैं। जिनको राजधानी में पदस्थ निगम अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवंटित किया जाता है। शासन द्वारा वर्ष जुलाई 2000 के पहले 45 ए के अनुसार आई टाइप के मकानों के लिए 10 रुपए और एफ टाइप के मकानों के लिए 105 रुपए की राशि निर्धारित की गई थी, लेकिन जुलाई 2000 में इसको संशोधित कर दिया गया और आई टाइप के मकानों के लिए 50 एवं एफ टाइप के मकानों के लिए 420 रुपए की राशि निर्धारित कर दी गई। इसमें भी जिन कर्मचारियों के पास राजधानी में अपने निजी मकान हैं उनके लिए दरों में संशोधन कर दिया। इसमें आई टाइप के लिए 445 रु.एवं एफ टाइप के लिए 1330 रुपए निर्धारित किए है।
लागू नहीं की संशोधित दरें
जुलाई 2000 से शासन ने भले ही शासकीय आवासों के लिए संशोधित दरें लागू कर दी हो, लेकिन हाउसिंग कार्पोरेशन में काम करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इससे कोई प्रभाव नही पडा। नई दरें लागू होने के बाद भी निगम में पदस्थ अधिकारी-कर्मचारी आवंटित आवासों का किराया लाइसेंस शुल्क 45-ए के अनुसार पूर्व दरों में चुका रहे है। अर्थात आई टाइप मकानों के लिए 10 रुपए एवं एफ टाइप के लिए 105 रुपए की दर से किराए का भुगतान निगम को कर रहे है।
लाखों रुपए का घोटाला
यदि पिछलें दस सालों में देखे तो यह राशि करोडों रुपए तक जा सकती है। इस समय राजधानी में करीब 41 अधिकारी-कर्मचारी निगम द्वारा आवंटित मकानों में रह रहे है। इसमें पचास फीसदी ऐसे कर्मचारी है जिनके खुद के मकान राजधानी में है और दस रुपए की दर से शासकीय मकानों पर कब्जा जमाए हैं ताकि अपने मकान को किराए पर दिया जा सके।
इनके पास हैं निजी आवास
तकनीकी सहायक डीके हवलदार , एस के दहायत, विनोद कौशिक, माया देवी, विजय दाक्षा, मुन्नालाल, साधना जैन, राजेन्द्र शर्मा, आरएन पाठक, मदनलाल गैहलोत, जेपी सेन, अनिल वाजपेई, प्रेम नारायण मेहरा, एनएस रैकवार, ओपी कुशवाह, बलराम, राजेश रोकडे,अशोक राजपूत, तरवर, पीके अवस्थी, बीसी शाह शामिल है।
अपात्रों ने भी जमाया कब्जा
कई ऐसे भी कर्मचारी है जिन्होंने महौल का पूरा फायदा उठाया है। पात्रता नही होने के बावजूद करीब दर्जन भर अधिकरी -कर्मचारी एचआईजी स्तर के मकानों में कब्जा जमाए है। लेकिन इस खेल में सब शामिल है तो प्र*तिमाह हो रहे लाखों रुपए के गोलमाल को पूछे भी तो कौन। अपात्रों की सूची में कनिष्ठ सहायक योगेन्द्र सिंह, तकनीकी सहायक डीके हवलदार, कनिष्ठ सहायक विनोद कौशिक, एसएन मीना, टायपिस्ट कुलश्रेष्ठ शामिल है। |