| | हादसे का इंतजार | | | |
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भोपाल। रेलवे माल गोदाम में लोडिंग अनलोडिंग करने वाले मजदूर व ठेकेदार जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर है। रेल प्रशासन की लापरवाही के चलते इन लोगों के साथ कभी भी किसी बडी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता है। दरअसल निशातपुरा माल गोदाम में ट्रैक के पास तीन फीट लंबे गड्ढे हो गए है। जब रैक से भरी ट्रेन गोदाम के भीतर आती है , तो उसके पलटने का अंदेशा रहता है। इसको लेकर मजदूर काम करते समय दुर्घटना को लेकर खासे भयभीत रहते है।
जान हथेली पर रखकर काम
माल की लोडिंग अनलोडिंग करने वाले मजदूर और ठेकेदार जान हथेली पर रखकर काम करने को मजबूर है। रेलवे ट्रैक पर तीन से पांच फीट के गड्ढे के कारण यहां लगने वाली क्रेन तिरछी होकर पलटने का खतरा हमेशा रहता है। कई बार क्रेन पलट भी चुकी है। बार -बार शिकायतों के बावजूद रेल प्रशासन इसे गंभीरता से नही ले रहा है।
हाल में हुई थी दुर्घटना
आठ दिन पूर्व माल को अनलोड करते समय एक क्रेन ट्रैक के किनारे बने चार फीट लंबे गड्ढे में फंस कर पलट गई थी , जिसमें चार मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। इस प्रकार के छोटे-बडे हादसे यहां लगातार हो रहे हैं।
हो सकता है बडा हादसा
माल गोदाम में लगभग तीन सौ मजदूर लोडिंग अनलोडिंग कार्य करते है। ट्रैक के पास चार -चार फीट लंबे गड्ढे बन गए है। जब रैक से भरी एक ट्रेन मालगोदाम के भीतर आती है, तो कई बार पटरी पर लहरा जाती है। ऐसे में पटरी से ट्रेन उतर जाए या फिर बडी-बडी क्रेनें पलट जाए तो बडा हादसा हो सकता है।
कई पत्र लिखे , नतीजा शून्य
ठेकेदारों ने मालगोदाम में टैक के पास बने गड्ढे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए कई पत्र लिखे , लेकिन रेल प्रबंधन द्वारा इन पत्रों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
यहीं पर होती है लोडिंग
यहां पर कोयला , खाद, स्टील, लोहा, सीमेंट सहित कई वस्तुओं की लोडिंग अनलोडिंग होती है। लाखों रुपए के राजस्व के बाद भी रेलवे यहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर कुछ नहीं किया जा रहा है। ठेकेदार संजय जॉनी कहते हैं कि यहां पर तीन से पांच फीट के गड्ढे बने हुए है। कई बार क्रेन पलट चुकी है। रेलवे से कई बार शिकायत कर चुकी है, लेकिन कोई सुनता ही नहीं। |
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