| | मास्टरजी अब सिर्फ पढाएंगे | | | |
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भोपाल। मास्टर जी अब सभी सर्वेक्षण व अभियानों में आंकडे जमा करने के दायित्वों से मुक्त होने जा रहे हैं , क्योंकि एक अप्रैल से शिक्षा का अधिकार लागू होते ही प्रदेश के करीब 12 लाख शिक्षकों को सभी गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति मिल जाएगी। शिक्षा का अधिकार लागू होते ही शिक्षक स्कूल में ज्यादा से ज्यादा बच्चों को पढने में मशरूफ नजर आएगे।
अन्य कार्यों पर होगी रोक
शिक्षा के अधिकार को लेकर जारी हुए सर्कुलर में शिक्षकों द्वारा अन्य कार्य करने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि जनगणना और चुनाव ड्यूटी में उन्हें आगे भी अपना योगदान जारी रखना होगा। इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि जनगणना इस साल में सिर्फ एक बार होती है और चुनाव पांच साल में एक बार आते हैं।
चुनावों के लिए विशेष मॉडल
सूत्रों के मुताबिक चुनावों में अध्यापकों की ड्यूटी लगाने को लेकर विशेष मॉडल तैया किया गया है। इसमें निकाय , विधान सभा, लोकसभा चुनावों में टीचरों की ड्यूटी देनी होगी, लेकिन यह कार्य सिर्फ चुनाव के दिन के लिए ही होगा। अब शिक्षकों का वोटर लिस्ट बनाने में तथा सरकारी सर्वेक्षण आदि कार्यों में सरकार इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।
आपदा में देना होगा सहयोग
राज्य में अगर कहीं कोई बाढ , सूखा, बारिश या अन्य कोई भी प्राकृतिक आपदा आती है तो ऐसी परिस्थिति में शिक्षकों को सहयोग देना होगा।
पढाई होती थी बाधित
राज्यों में शिक्षकों से पोलियों कार्यक्रम से लेकर , सरकारी सर्वेक्षण तैयार करने , वोटर लिस्ट बनाने , प्रौढ शिक्षा कार्यक्रमों को अंजाम देने , जिला प्रशासन द्वारा आयोजित किए जाने वाले कई जनोपयोगी कार्यक्रम समेत करीब दर्जन भर कार्य लिए जाते हैं। हालांकि इस तरह के कार्यों के लिए मास्टरों को अतिरिक्त मेहनताना भी मिलता है, लेकिन बच्चों की पढाई बहुत बुरी तरह से प्रभावित होती है।
बडी योजनाएं होंगी प्रभावित
राज्य में शिक्षा अधिकार लागू होने से पोलियो उन्मूलन तथा ऐसी ही कई बडे पैमाने पर चलने वाली सरकारी योजनाएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। |
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