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नई दिल्ली। भारत के लिए हीरो होंडा एफआईएच विश्वकप हॉकी टूर्नामेंट में उठा तूफान तो अब थम चुका है , लेकिन टीम के सामने अब आखिरी चुनौती के रूप में सातवां स्थान बचा है। भारत को सातवां स्थान हासिल करने के लिए अर्जेंटीना से शुक्रवार को भिडना है और उसके लिए यह मुकाबला भी करो या मरो जैसा होगा। भारत पिछले विश्वकप में 11वें स्थान पर रहा था। लेकिन इस बार उसने अपनी स्थिति में कुछ सुधार किया है और वह सातवें से आठवें स्थान के लिए खेलने जा रहा है। फिर भी टीम इस बात पर संतोष कर रही है कि वह पिछले विश्वकप के मुकाबले इस बार बेहतर स्थिति में है।
भारत की फारवर्ड पंक्ति कमजोर
भारत ने विश्वकप में पाकिस्तान को हराकर जोरदार शुरुआत की थी मगर उसके बाद उसके प्रदर्शन में निरंतर गिरावट आती गई। वह आस्ट्रेलिया और स्पेन से एक समान अंतर से 2-5 से पिटा इंग्लैंड ने उसे 4-3 से हराया और दक्षिण अफ्रीका के साथ उसका मैच 3-3 से ड्राॅ रहा। भारत ने जिस मजबूत फारवर्ड पंक्ति की बात की थी वह केवल बिखरे-बिखरे मौकों पर ही कुछ अच्छा प्रदर्शन कर पाई। वरना टीम का प्रदर्शन ऐसा नहीं था कि जो उसे चैंपियन बना सकता। खुद कोच ब्रासा भी यह स्वीकार करते हैं कि उनका लक्ष्य विश्वकप नहीं बल्कि इस वर्ष अक्टूबर नंवबर में होने वाले राष्ट्रमंडल और एशियाई खेल हैं। मगर हॉकी के पूर्व ओलंपियन मानते हैं कि टीम में कोई दमखम नहीं है
1994 के विश्वकप में 5वां स्थान
अब भारत के सामने एक आखिरी मौका है कि वह अर्जेंटीना को परास्त करे और सातवां स्थान हासिल करे। भारत 1994 के विश्वकप में पांचवें स्थान पर रहा था। उसके बाद वह नौंवे, दसवें और 11वें स्थान पर रहा है। उस खराब इतिहास को देखते हुए यदि भारतीय टीम सातवां स्थान भी हासिल कर लेती है तो उसके लिए यह एक उपलब्धि ही कही जाएगी।
अर्जेंटीना की नजरें इस बात पर लगी होंगी कि वह आखिरी मैच में मेजबान टीम की उम्मीदों को तोडकर सातवां स्थान हासिल करे। भारत और अर्जेंटीना के बीच विश्वकप में अबतक सात बार मुकाबला हुआ है और उन मुकाबलों में पलडा अर्जेंटीना का ही भारी है। भारत ने सिर्फ ने दो मैच जीते हैं और चार मैच हारे हैं। पिछले विश्वकप में नौंवे से 12वें स्थान के मुकाबले में अर्जेंटीना ने भारत को 3-2 से पराजित किया था। |