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On 3/11/2010 9:51:04 PM

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पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) ने अपने क्रिकेटरों की पीठ पर जो चाबुक फटकारा है, उससे उत्पन्न झन्नाटे क्रिकेट की पूरी दुनिया में महसूस किए जाएंगे। वैसे तो चपेट में सात क्रिकेटर आए, पर दो-यानी कप्तान मोहम्मद यूसुफ व पूर्व कप्तान यूनुस खान के खेलने पर तो हमेशा के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है। इससे भी बडी घटना यह है कि पीसीबी ने इस प्रतिबंध का उचित कारण भी नहीं बताया। ऐसा नहीं है कि उसने कारण बताया ही नहीं। बताया तो है, पर जो बताया है, वह किसी को हजम नहीं हो रहा है। क्रिकेट की राजनीति और रणनीति के सभी जानकारों को पीसीबी द्वारा बताया गया कारण खट्टी डकारें लेने को ही मजबूर कर रहा है।

माजरा यूं है कि हाल ही में पाकिस्तान की क्रिकेट टीम आस्ट्रेलिया के दौरे पर गई थी। वहां उसकी शर्मनाक हार भी हुई थी। पीसीबी ने हार के कारणों पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया था, जिसने निष्कर्ष निकाला कि पाकिस्तानी टीम की आस्ट्रेलिया में फजीहत इसलिए हुई, क्योंकि टीम के सभी खिलाडियों के बीच अनुशासन और समन्वय की कमी थी। इससे तो कोई इनकार नहीं कर सकता कि पाकिस्तान की टीम में गुटबाजी कुछ उसी तरह चलने लगी है, जैसी भारत के कुछ राजनीतिक दलों में चलती है, पर केवल इसी कारण से दो धुरंधर क्रिकेटरों को हमेशा-हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाए, तो फिर बात हैरानी की है ही। न तो पाकिस्तान की टीम की गुटबाजी नई है और न ही वैसी हार भी, जैसी आस्ट्रेलिया में हुई है, पर क्रिकेटरों के खिलाफ इतनी कठोर कार्रवाई इससे पहले कभी नहीं हुई, तो क्यों नहीं हुई? यह सवाल पीसीबी से पूछा ही जाएगा। पाकिस्तानी टीम के नए और मुख्य कोच वकार यूनुस ने पीसीबी से यह सवाल फिलहाल पूछ भी लिया है।

अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को भी चाहिए कि वह भी पीसीबी से यही सवाल पूछे। शंका की बात यह है कि कहीं पीसीबी अपने दो क्रिकेटरों पर प्रतिबंध के किसी मैच फिक्सिंग जैसे कारण को छिपा तो नहीं रही है? वैसे क्रिकेट को अगर दीर्घजीवी बनाना है, तो वैसे ही कठोर फैसले करने ही होंगे, जैसा पीसीबी ने किया है, पर उस पर उंगलियां इसलिए उठाई जा रही हैं कि बताए जा रहे कारणों की तुलना में सजा बहुत बडी है। लगता तो यही है कि इतनी बडी सजा का कारण भी बडा ही होगा। पीसीबी अपनी स्थिति जल्दी साफ करे, वरना उसका फैसला संदेह के दायरे में आएगा ही।

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