| | किसी की नजर न लगे | | | |
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ग्लोबल स्टाफिंग सर्विस फर्म ने आकलन किया है कि भारत में फाइनेंस , रीयल एस्टेट सहित लगभग सारे क्षेत्रों में अगले तीन महीनों के दौरान नौकरियों की बहार आ जाएगी। इसका अर्थ यह है कि देश मंदी से उबर चुका है। औद्योगिक उत्पादन बढा है। उपभोक्ता सामान की मांग में इजाफा होने लगा है। आईटी और बीपीओ ने सबसे ज्यादा लोगों को रोजगार देकर यह भी साबित किया है कि ये दोनों क्षेत्र अपने पैरों पर खडे हैं। सराहनीय यह है कि इन क्षेत्रों ने यह उपलब्धि अमेरिका के पूरी तरह मंदी से न उबर पाने और उसके द्वारा आउटसोर्सिंग को हतोत्साहित किए जाने के बावजूद हासिल की है। अब तो इन क्षेत्रों सहित आने वाले दिनों में देश की सर्विस, फाइनेंस, बीमा तथा रीयल एस्टेट क्षेत्र की कंपनियों में रोजगार के अवसर पिछली तिमाही की तुलना में चार फीसदी बढने के आसार भी हैं। एक तिमाही में चार फीसदी तक के बढत अनुमानों को कम करके मत आंकिए। दरअसल, वर्ष-2008 की तीसरी तिमाही के बाद भारतीय कंपनियों में पहली बार रोजगार के भारी अवसर बढने जा रहे हैं।
वैसे तो वर्ष -2009 में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भी भारतीय कंपनियों ने जबर्दस्त भर्तियां की थीं। इनमें आईटी और बीपीओ क्षेत्र सबसे आगे रहा था। तब करीब 6.38 लाख नए लोगों को रोजगार मिला था। बस, उसके बाद से ही मानो हमारी अर्थव्यवस्था को किसी की बुरी नजर लग गई थी। यूं तो पूरी दुनिया मंदी की चपेट में आ गई थी। वह उससे अभी उबर भी नहीं पाई है, पर भारत की अर्थव्यवस्था को मंदी से बचना चाहिए था, लेकिन बच नहीं पाई थी। अब जबकि हमारी अर्थव्यवस्था प्रगति के तराने गुनगुनाने लगी है, तो देश को भी उसके साथ झूम उठना चाहिए। मंदी का बुरा दौर खत्म होना और रोजगार के अवसरों में इजाफा होना है ही प्रसन्नता का विषय। |
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