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अब तो पाकिस्तानियों ने अति कर दी
On 8/31/2010 11:48:58 PM

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इससे पहले क्रिकेट के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि एक बडी टीम के सारे बडे खिलाडियों और कप्तान तक के टेलीफोन जब्त कर लिए गए हों और उनके सिर पर जेल जाने से लेकर खेल खराब होने तक का खतरा मौजूद हो। मैच फिक्सिंग के इस नए मामले को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी कितने हताश, दुखी और निराश थे, यह टीवी पर दिख रहा था और इतना भी साफ नजर आ रहा था कि कम से कम इस बार वे अभिनय नहीं कर रहे हैं।

मैच फिक्सिंग के मामले में पकडा तो पाकिस्तानी टीम का दलाल गया था, पर उसने यह बयान देकर सबको उलझा दिया है कि वह भारतीय गिरोहों के लिए काम करता है। भारत में क्रिकेट मैच फिक्सिंग का अच्छा खासा रिकॉर्ड है। एक बार कई लोग गिरफ्तार भी हो चुके हैं और भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तानों में से एक अजहरुद्दीन पर जिंदगी भर क्रिकेट नहीं खेलने की पाबंदी लग चुकी है। यह मामला अब भी अदालत में है, पर कई बडे नाम देश छोडकर भाग गए और अजहर नेता बन गए हैं।

यानी, भारतीय मैच फिक्सिंग गिरोहों का इस झमेले में शामिल होना या किया जाना पाकिस्तानी साजिश नहीं है। दरअसल, दिल्ली, मुंबई और कई राज्यों की राजधानियों में बाकायदा टीवी और कंप्यूटर लगाकर दर्जनों मोबाइलों के जरिए फिक्सिंग और भुगतान की बोलियां लगती हैं। पिछले पांच साल में ऐसे पच्चीस से ज्यादा गिरोह पकडे जा चुके हैं, इसीलिए दिल्ली पुलिस और राजस्व विभाग के प्रवर्तन निदेशालय को बहुत मेहनत करनी पडेगी कि इस फिक्सिंग के दागी सामने आ ही जाएं। दिल्ली का चांदनी चौक और सदर इलाका मैच फिक्सिंग का एक पुराना अड्डा है और यहां पर बडे-बडे गिरोह होने की खबर भी मिली है।

मगर, बात अकेले भारत या पाकिस्तान की ही नहीं है। मैच फिक्सिंग की गिरफ्त में बहरहाल तो पूरा विश्व क्रिकेट है। मेट्रोपॉलिटन पुलिस द्वारा लंदन में रहने वाले मजहर माजीद को गिरफ्तार करने से पहले ब्रिटेन के अखबार द न्यूज ऑफ द वर्ल्ड द्वारा किए गए एक स्टिंग ऑपरेशन में माजीद ने अखबार से 150 हजार पाउंड लिए और पहचान छिपाकर उससे मिलने वाले संवाददाता से वादा किया कि पाकिस्तानी तेज गेंदबाज निर्धारित समय पर लॉर्ड्स टेस्ट में नो-बॉल फेंकेंगे। अखबार ने इस स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो स्कॉटलैंड यार्ड को मुहैया कराया है। स्कॉटलैंड यार्ड ने इसी के आधार पर ही मामले की जांच शुरू की है। स्कॉटलैंड यार्ड के अधिकारियों ने इन आरोपों की जांच के लिए उस होटल का भी दौरा किया, जहां पाकिस्तानी टीम ठहरी हुई है। इस दौरान अधिकारियों ने टीम के कप्तान सलमान बट्ट, आसिफ, आमिर व कामरान अकमल से पूछताछ की। पाकिस्तान के समाचार चैनल जियो टीवी ने इस संबंध में कहा है कि स्कॉटलैंड यार्ड के अधिकारियों ने बट्ट, आसिफ, आमिर और अकमल से पूछताछ करने के अलावा सईद से भी पूछताछ की है। सईद ने हालांकि पुलिस द्वारा खिलाडियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप खंगाले जाने संबंधी मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है, पर आसिफ की प्रेमिका वीना मलिक ने सब कुछ साफ कर दिया है। उसकी मानें, तो वर्ष-2010 में ऐसा एक भी मैच नहीं हुआ या होना है, जो पहले से ही फिक्स न हो। इसके बाद शरद पवार की आईसीसी भी सक्रिय हो गई है।

आईसीसी ने कहा है कि मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने आईसीसी, इंग्लैंड और पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्डों को इस बात की जानकारी दी है कि एक 35 वर्षीय व्यक्ति को मैच फिक्सिंग के संदेह में गिरफ्तार किया गया है। इस बारे में अब तक किसी खिलाडी या अधिकारी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। हालांकि, पाकिस्तान के कुछ खिलाडियों को अभ्यास करने से रोक दिया गया है। संभव है कि लॉर्ड्स में होने वाले वनडे से पहले उनके खेलने पर प्रतिबंध भी लगा दिया जाए। इस प्रकार, पाकिस्तान के कई क्रिकेटरों पर शिकंजा कसता जा रहा है। कई क्रिकेटरों से पूछताछ हो रही है, तो तीन खिलाडियों के फोन भी जब्त कर लिए गए हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।

उधर, कथित फिक्सर माजीद मजहर को जमानत पर छोड दिया गया है और पुलिस ने भी उस पर कोई आरोप नहीं लगाया है, पर क्रिकेट की मां कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान से उठा क्रिकेट की दुनिया का बवंडर आज न केवल पाकिस्तानी खिलाडियों के लिए भारी पड रहा है, बल्कि पूरा क्रिकेट जगत सवालों के दायरे में है। क्रिकेट के मैदान पर कदमों की चूक से इतना बडा तहलका मचा कि आईसीसी, पीसीबी, इंग्लैंड व पाकिस्तान में खलबली मच गई। साफ है क्रिकेट की दुनिया में आए इस सबसे बडे भूचाल का थमना फिलहाल संभव नहीं है। खासकर तब, जबकि पाकिस्तानी क्रिकेटर इंग्लैंड में हैं।

अब सवाल यह है कि क्या पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड इस बार ऐसे सख्त कदम उठाएगा, ताकि क्रिकेटरों के लिए वे भविष्य में नजीर बन सकें? वैसे तो मैच फिक्सिंग का खुलासा होने के बाद पाकिस्तान में हडकंप मचा हुआ है। सियासी गलियारों से लेकर आम आदमी तक हर कोई इस कारण अपने क्रिकेटरों से नाराज है। लोग दोषी क्रिकेटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। खबरें तो ऐसी भी आई हैं कि इससे आतंकवादी तक अपने क्रिकेटरों से नाराज हो गए हैं। उन्होंने उनके सिरों पर इनाम तक घोषित कर दिया है, पर पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड और सरकार, दोनों इन सभी बातों का खंडन कर रहे हैं। पीसीबी ने घोषणा की है कि वह अपनी टीम को भी मामले की जांच के लिए ब्रिटेन भेजेगी। हर किसी की नजर इसी जांच पर टिकी है। बहरहाल, पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी फिक्सिंग के ताजा आरोपों से हैरान हैं, तो प्रधानमंत्री ने भी घटना को शर्मसार करने वाला बताते हुए इस पर क्रिकेट बोर्ड से रिपोर्ट मांगी है। ऐसे में एक और अहम सवाल यह भी है कि अगर क्रिकेटरों के खिलाफ सबूत सच पाए गए, तो उन्हें क्या सजा मिलेगी?

इग्लैंड के फिक्सिंग कानून के मुताबिक आरोप साबित होने पर 51 हफ्ते की सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है, जबकि आरोपी क्रिकेटरों के क्रिकेट खेलने पर पाबंदी लगाने का पूरा अधिकार आईसीसी और पाकिस्तानी क्रिकेट बोर्ड के पास है। जो लोग पाकिस्तान के स्वभाव से परिचित हैं, वे इस बात को भी जानते होंगे कि वह अपने खिलाडियों को बचाने की कोशिश ही करेगा। यदि पाकिस्तान के खिलाडी चाहते, तो क्रिकेट के मैचों की फिक्सिंग की शुरुआत हो ही नहीं सकती थी। सटोरियों और दुबई के अपराधियों से पाकिस्तानियों के ही संबंध हैं और उनकी अन्य देशों के खिलाडियों तक पहुंच पाकिस्तानियों के जरिए ही हुई है। कुल मिलाकर पाकिस्तान की सरकार और पीसीबी तो इस मामले में कुछ नहीं करेगी। अतः गेंद आईसीसी के पाले में ही है। हमारी नजर इस पर होनी चाहिए कि शरद पवार आईसीसी के अध्यक्ष की हैसियत से क्या करते हैं? कहीं वे आईसीसी को भारत का कृषि मंत्रालय तो नहीं बना देंगे?

--सुप्रिया रॉय

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