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विश्वविद्यालय को है कुलपति की तलाश
On 8/31/2010 11:51:58 PM

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अनेक विश्वविद्यालय कुलपति-विहीन हैं। अनेक कुलपतियों के सिर पर तलवार लटक रही है। जिन्हें कुलपति बनाने का प्रस्ताव है, उनकी पत्नियां घबराई हुई हैं। महामृत्युंजय मंत्र-जाप करा रही हैं। राज्यपालगण कुलाधिपति हैं। अभी तक अपने-अपने वृद्धाश्रमों में चैन से बैठे थे, लेकिन अब कुलपति-विहीन विश्वविद्यालयों की चिंता ने उन्हें भी चिंतित कर दिया। तमाम कुलाधिपति देश के प्रधानमंत्री से मिले। प्रभु! राष्ट्रभारती महाभारत की गिरफ्त में है। जिसे भी कुलपति बनाओ, उसके प्रभार-ग्रहण करने के पहले ही घपलों-घोटालों की खबरें आने लगती हैं। विद्यार्थी आंदोलन करने लगते हैं। स्टाफ हडताल कर देता है। अब आप ही हमारा उद्धार सकते हो।

प्रधानमंत्री ने एक मिनट चिंतन-मुद्रा में बिताया। फिर बोले-तीन विकल्प हैं। पहला-‘अपने विश्वविद्यालय की यूनियन के अध्यक्ष को पदेन-कुलपति बना दें। यानी, टु कैच ए थीफ, सैट ए थीफ।दूसरा विकल्प-‘आप मनोनयन कर दें। प्रतिक्रिया स्वरूप मनोनीत कुलपतियों की पत्नियां आफ लिए जो महामारक अनुष्ठान करेंगीं, उसकी काट में आप अभी से महामृत्युंजय मंत्र-जाप प्रारंभ कर देंऔर तीसरा विकल्प यह है कि कुलपति का पद एडवरटाइज कर दें।कुलाधिपतियों को तीसरा विकल्प पसंद आया। सचिव ने नोटशीट लिखी-‘महामहिम कुलाधिपति परंपरा को खोजना चाहेंगे। तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की योग्यता कैसे निर्धारित की गई थी? विद्यार्थी गुरुकुल में दीर्घकाल तक विद्याध्यन करते थे। भारतीय पुरातत्व यानी एएसआई से कहा जाए कि वह पुराकालीन आलेखों के आधार पर कुलपतियों की योग्यता-विषयक टीप दे।

कुलाधिपति ने नोटशीट पर लिखा-‘दीर्घकालीन शिक्षा की अवधारणा अनुत्पादक है। अब विद्यार्थी शीघ्र परिणाम चाहते हैं। महर्षि विश्वामित्र का पैटर्न अपनाया जाए। गुरुगृह गए पढन रघुराई, अल्पकाल विद्या सब पाई। एएसआई से पूछना व्यर्थ है। वह तो रामसेतु-प्रकरण में पहले ही कबाडा कर चुकी है। तीन शतायु-जटायु कुलपतियों की समिति का गठन करें। वही समिति कुलपति की योग्यता-अहर्ता निर्धारित करे।उक्त समिति ने जो योग्यताएं निर्धारित कीं, उनके आधार पर कुलपति चयन हेतु निम्न विज्ञापन दिया गया। आवश्यकता है, विश्वविद्यालयों हेतु कुलपतियों की। मूल अहर्ताएं-दो हफ्तों में पीएचडी या डी लिट की थीसिस सबमिट कर दी हो। काफी समय तक एमए (प्री) में रहकर विश्वविद्यालय का विद्यार्थी और छात्रवास का रहवासी बना रहा हो। छात्र यूनियन के चुनावों में कम से कम चार प्रोफेसरों को चटकाया हो। कालेज के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में चंदे का आचमन करने का पांच साल का अनुभव हो। ठेके पर नकल कराने, नंबर बढवाने, फिल्में, किताबें और पुतले फूंकने में अभिरुचि हो। रीढ-विहीनों को प्राथमिकता। सुलभ इंटरनेशनल में मैला-मैनेजमेंट का अनुभव, क्योंकि विश्वविद्यालय में यही सब करना पडेगा। लालू-राज के चरवाहे-विद्यालयों से प्राइमरी पास को प्राथमिकता।

--घनश्याम सक्सेना

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