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डायरेक्ट टैक्स कोड विधेयक लोकसभा में पेश होने के बाद समीक्षा के लिए संसद की एक विशेष समिति के पास भेज दिया गया है। कहा जा रहा है कि आयकर के ढांचे में बुनियादी बदलाव लाने वाला यह कानून अब 1 अप्रैल-2011 की जगह 1 अप्रैल-2012 से लागू होगा। बहरहाल, केंद्र सरकार के इस कदम पर देश में दो तरह की प्रतिक्रियाएं सुनने को मिली हैं। चूंकि इसमें दो लाख तक की वार्षिक आय को आयकर से पूरी तरह मुक्त रखा गया है, इसलिए कुछ लोग दुखी हैं कि इस कानून को एक वर्ष के लिए टाला क्यों गया? उधर, ऐसे लोगों की तादाद भी कम नहीं है, जिनके चेहरे पर इस कानून के टलने से पैदा हुई चमक साफ-साफ देखी जा सकती है। ऐसे लोगों को दरअसल इस विधेयक के एक करोड की कमाई पर एक फीसदी अतिरिक्त कर लगाने जैसे कुछ प्रावधान परेशान कर रहे थे। यही लोग कह रहे हैं कि चाहे एक साल के लिए टली हो, पर मुसीबत टली तो।
खैर , जिसे इस विधेयक के टलने पर प्रसन्नता जाहिर करनी हो, वह इसके लिए स्वतंत्र है और जिसे मायूस होना हो, वह मायूस होने के लिए भी, पर उसमें ऐसा है कुछ नहीं, जिस पर दुखी या प्रसन्न हुआ जा सके। कहा जा सकता है कि जिनकी वार्षिक आमदनी दो लाख तक है, चूंकि उन्हें कोई आयकर नहीं देना होगा, इसीलिए उनके लिए यह राहत ही तो है। वस्तुतः उनके लिए यह राहत है भी, पर तब, जब इधर से पैसा आए और उधर खर्च होता जाए। यदि ऐसे लोगों ने पैसा बचाया, उसे प्रोविडेंट आदि फंडों या बीमा के अलावा किसी अन्य बचत स्कीम में निवेश किया, तो वे तत्काल टैक्स के दायरे में आ जाएंगे। यानी, इस नए कानून के माध्यम से केवल इसकी टोपी उसके सिर और उसकी टोपी इसके सिर रखने की कसरत ही की गई है। अतः यह लागू हो जाए, तो कैसी खुशी और टल गया, तो कैसा दुख? |