गड़बड़ा गया है प्रकृति का पारंपरिक चक्र*सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता निकाल दिया*भारत-चीन के बीच जंग असंभव*चेन्नई की घटना से सबक ले समाज*फिर बनाने होंगे 1953 जैसे हालात*सीबीआई जया के खिलाफ पहुंची सुप्रीम कोर्ट*पॉल हॉलीवुड वॉक ऑफ द फेम से सम्मान*शाहरूख से मिलने के लिए बेताब प्रशंसक*सबसे शक्तिशाली लेजर केंद्र बनाएगा रूस*पेरू में बाढ़ से 14 मरे, 22 प्रांतों में परिवहन ठप*
सीबीआई जया के खिलाफ पहुंची सुप्रीम कोर्ट
अभी तक भारत के लिए रहस्य बना है एडिलेड
ओडिशा में नक्सली हमला, BSF के चार अधिकारी शहीद
मंत्री ने अपने क्षेत्र में बंद कराई बिजली, रोका अखबार
मुख्यपृष्ठ राष्ट्रीय विश्व शहर  व्यापार खेल मनोरंजन शिक्षा सम्पादकीय क्लासिफाइड Appointment पत्रिकाएँ आज का पंचांग
डायरेक्ट टैक्स कोड विधेयक का सच
On 9/1/2010 12:05:22 AM

Change font size:A | A

Print

E-mail

Comments

Rating

Bookmark

 

डायरेक्ट टैक्स कोड विधेयक लोकसभा में पेश होने के बाद समीक्षा के लिए संसद की एक विशेष समिति के पास भेज दिया गया है। कहा जा रहा है कि आयकर के ढांचे में बुनियादी बदलाव लाने वाला यह कानून अब 1 अप्रैल-2011 की जगह 1 अप्रैल-2012 से लागू होगा। बहरहाल, केंद्र सरकार के इस कदम पर देश में दो तरह की प्रतिक्रियाएं सुनने को मिली हैं। चूंकि इसमें दो लाख तक की वार्षिक आय को आयकर से पूरी तरह मुक्त रखा गया है, इसलिए कुछ लोग दुखी हैं कि इस कानून को एक वर्ष के लिए टाला क्यों गया? उधर, ऐसे लोगों की तादाद भी कम नहीं है, जिनके चेहरे पर इस कानून के टलने से पैदा हुई चमक साफ-साफ देखी जा सकती है। ऐसे लोगों को दरअसल इस विधेयक के एक करोड की कमाई पर एक फीसदी अतिरिक्त कर लगाने जैसे कुछ प्रावधान परेशान कर रहे थे। यही लोग कह रहे हैं कि चाहे एक साल के लिए टली हो, पर मुसीबत टली तो।

खैर, जिसे इस विधेयक के टलने पर प्रसन्नता जाहिर करनी हो, वह इसके लिए स्वतंत्र है और जिसे मायूस होना हो, वह मायूस होने के लिए भी, पर उसमें ऐसा है कुछ नहीं, जिस पर दुखी या प्रसन्न हुआ जा सके। कहा जा सकता है कि जिनकी वार्षिक आमदनी दो लाख तक है, चूंकि उन्हें कोई आयकर नहीं देना होगा, इसीलिए उनके लिए यह राहत ही तो है। वस्तुतः उनके लिए यह राहत है भी, पर तब, जब इधर से पैसा आए और उधर खर्च होता जाए। यदि ऐसे लोगों ने पैसा बचाया, उसे प्रोविडेंट आदि फंडों या बीमा के अलावा किसी अन्य बचत स्कीम में निवेश किया, तो वे तत्काल टैक्स के दायरे में आ जाएंगे। यानी, इस नए कानून के माध्यम से केवल इसकी टोपी उसके सिर और उसकी टोपी इसके सिर रखने की कसरत ही की गई है। अतः यह लागू हो जाए, तो कैसी खुशी और टल गया, तो कैसा दुख?

Post Comments
More News
मैकाले के मानसपुत्रों के चंग...
ओप्रा क्या जानें लाल बत्ती ल...
किसानों की तकलीफ समझें सरकार...
प्रणबदा की नींद उड़ने का कार...
उत्तरप्रदेश के वोटरों ने कमा...
फिर बनाने होंगे 1953 जैसे हा...
चेन्नई की घटना से सबक ले समा...
भारत-चीन के बीच जंग असंभव...
सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्...
गड़बड़ा गया है प्रकृति का पा...
क्रांति की उपलब्धियों को खो ...
चल रहा आश्वासन बांटने का अभि...
नाम, नमक और निशान के मायने...
मालदीव में सैनिक शासन की आहट...
मंत्रियों को यह सजा तो पर्या...
 सम्पर्क करें  विज्ञापन दरें आपके सुझाव संस्थान
© Copyright of Rajexpess 2009,all right reserved.
Developed & Designed By: