| | मलरिया, स्वाइन फ्लू, डेंगू के संक्रमण से हाहाकार | | | |
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भोपाल। राजधानी के हर अस्पताल में सुबह से लेकर शाम तक लग रही मरीजों की लम्बी -लम्बी कतार और तडपते रगी अस्पतालों में जिस उम्मीद को लेकर पहुंच रहे हैं। अस्पताल प्रबंधन उनकी इन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। मरीजों को अस्पतालों में आए दिन दवाओं, जांच, इलाज के नाम पर जो परेशानियां आ रही हैं। उनसे राज्य सरकार का यह दावा खोखला साबित हो रहा है कि बीमारियों की रोकथाम और मरीजों के उपचार में करोडों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सवाल यह खडा होता है कि आखिर जो राशि अस्पतालों को बेहतर बनाने और मरीजों को उचित उपचार देने के लिए मंजूर की थी। वह खर्च कहां की जा रही है?
मलेरिया का डंक , 42 फैल्सीमेरम की चपेट में
हर जगह पसरी गंदगी और ठसाठस भरे नाले से शहर की लगभग सभी छोटी -बडी बस्तियां व सम्भ*ांत कालोनियों में मच्छर की भरमार होने से 80 फीसदी बच्चे, महिलाएं और वृद्घ बीमारियों के संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। वायरल बुखार, मलेरिया और डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार बढती जा रही है। जनवरी से अगस्त तक जहां 1755 मरीज मलेरिया से पीडित हुए हैं, वहीं 42 फैल्सीफेरम की चपेट म आ गए हैं। मलेरिया विभाग में ही हर दिन 800 से 1000 स्लाइडें जांच के लिए पहुंच रही हैं। जिनमें 50 प्रतिशत रिपोर्ट पाजीटिव आ रही है। |
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