नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी को यात्रा की इजाजत देने से बीजिंग के इनकार करने के बाद इस पडोसी देश के साथ रिश्तों में आई कडवाहट के बीच ‘सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी’ की बैठक की गई, जिसमें चीन के लिए नियुक्त भारत के राजदूत एस. जयशंकर भी शामिल हुए। यह समझा जा रहा है कि उन्होंने पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रमों के बारे में कमेटी को बताया। दरअअसल,चीन ने हाल ही में लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल को अपने देश की यात्रा पर आने की इजाजत नहीं दी थी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन भी इस बैठक में मौजूद थे।
राज्यसभा में हंगामा
पीओके में चीनी सैनिकों के प्रवेश की खबरों का मुद्दा उठाते हुए रास में भाजपा ने कहा कि सरकार को इस बारे में चीन से बातचीत करना चाहिए। खबरों के मुताबिक पाक अधिकृत कश्मीर में 11 हजार चीनी सैनिक प्रवेश कर चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि इस बारे में जांच की जाएगी। भाजपा ने कहा कि क्या अब तक खुफिया एजेंसियों को इतनी बडी संख्या में चीनी सैनिकों के जमावडे का पता नहीं चला। उन्होंने कहा कि भारत की उत्तरी सीमा में चीन सडकों और आवागमन सुविधाओं का विकास कर रहा है।
एक और हरकतः म्यांमार बंदरगाह पर चीनी युद्धपोत
चीन ने अपने दो युद्धपोत म्यांमार के बंदरगाह पर पहुंचा दिए हैं। ऐसा पहली बार हुआ है। इसे एशिया की दूसरी सबसे बडी ताकत, भारत के करीबी समुद्री क्षेत्र में अपनी शक्ति बढाने की चीन की नीति के तहत किया गया है। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक चीन भारत के आसपास के समुद्री क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी लगातार मजबूत कर रहा है। वह इन क्षेत्रों में बंदरगाह तक तैयार कर रहा है। चीन हिंद महासागर में अपनी नौसेना की मौजूदगी बढाने के लिए बंगलादेश के चटगांव, श्रीलंका के हंबनटोटा और म्यांमार में क्याकप्यू में बंदरगाह बना रहा है।
चीनी सेना की मौजूदगी का पाक ने किया खंडन
इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने मंगलवार को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में 26 अगस्त को आई उन खबरों को ‘काल्पनिक’ करार देते हुए खारिज कर दिया, जिसमें देश के गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र को सौंपे जाने और उस इलाके में 10 हजार चीनी सेना की मौजूदगी की खबरें दी गई थीं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि सेलिग हैरीसन के पाकिस्तान विरोधी मानसिकता जगजाहिर है।तथ्यों को तोड-मरोडकर उनके द्वारा पेश किया जाना ज्यादा आश्चर्यजनक नहीं है और न ही भारत द्वारा उनके इस स्तंभ को इतनी तरजीह दिया जाना। दक्षिण एशिया मामलों के विशेषज्ञ हैरीसन ने दावा किया था कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी इस इलाके में प्रवेश कर गई है।
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