|
नई दिल्ली। पाकिस्तनी क्रिकेटरों पर लगे मैच फिक्सिंग के आरोपों और हाल ही में वेस्टइंडीज में हुए टवेंटी -20 विश्व कप के दौरान एक पब में क्रिकेट प्रेमियों से भारतीय खिलाडियों की झडप के मद्देनजर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने एक नई आचार संहिता लागू की है। अचार संहिता के मुताबिक कोई भी खिलाडी बाहरी लोगों से अपनी इच्छानुसार नहीं मिल पाएंगे। बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार घरेलू श्रृंखला हो या विदेशी दौरा, टीम इंडिया के खिलाडी बिना टीम मैनेजर की अनुमति के कहीं आ-जा नहीं सकेंगे। यह आचार संहिता ऐसे समय में लागू की गयी है जब पाकिस्तान के क्रिकेट खिलाडियों के स्पाट फिक्सिग में शमिल होने का मामला सामने आया है। टीम अब न तो निजी तौर पर आमंत्रित भोज में शामिल होगी और न ही ऐसे आमंत्रण स्वीकारेगी। विदेश दौरों पर केवल भारतीय उच्चायोग की ओर आयोजित भोज में ही टीम सम्मिलित हो सकेंगे।
केवल पत्नियों को इजाजत
नई आचार संहिता के अनुसार केवल खिलाडियों की पत्नी ही उन तक बेरोक टोक आ -जा सकेंगी। इसके बाद खिलाडियों के मैनेजरों या अन्य प्रतिनिधियों को भी उनसे मिलने के लिए टीम प्रबंधन की अनुमति लेनी होगी। वरना वापस भेज देंगे मैनेजरः प्रत्येक खिलाडी की हर गतिविधि पर टीम मैनेजर की नजर होगी और वह इसकी रिपोर्ट बीसीसीआई को भेजते रहेंगे। खिलाडी आचार संहिता का उल्लंघन करता है तो उसे वापस भेजने का अधिकार मैनेजर को होगा।
सचिन क्रिकेट की बदनामी से दुखी
मैच फिक्सिंग के मामले ने क्रिकेट की दुनिया को झकझोर कर रख दिया है। दुनिया के सबसे बडे और सम्मानित खिलाडियों में से एक सचिन तेंदुलकर ने इस घटना पर अफसोस जताते हुए कहा कि जब लोग इस खेल को अपमानित करते हैं , तो मुझे बहुत तकलीफ होती है। इससे क्रिकेट पर बुरा असर पडता है, जिसे हमेशा सही दिशा में आगे बढाना चाहिए। इस तरह की घटना से क्रिकेटरों पर अच्छा असर नहीं पडेगा। सचिन ने कहा कि यह ऐसी चीज है, जिसे हर कोई मिटाकर चाहेगा कि क्रिकेट सही दिशा में आगे बढे।
फिक्सिंग 200 साल पुराना रोग
पिछले डेढ दशक से समय समय पर क्रिकेट जगत को थर्राने वाले मैच फिक्सिंग की भद्रजनों के खेल में शुरुआत आज से लगभग 200 साल पहले हो गई थी और तब एक खिलाडी पर बाकायदा प्रतिबंध भी लगाया गया था। सबसे पहले 1817 से 1820 के आस-पास इस खेल की अखंडता खतरे में पडती नजर आई थी। इतिहासविद डेविड अंडरडाउन ने अपनी किताब स्टार्ट आफ प्ले क्रिकेट एंड कल्चर इन एटींथ सेंचुरी इंग्लैंड में लिखा है कि असल में सिंगल विकेट क्रिकेट में पूरे 11 खिलाडी नहीं होते थे और इसलिए उन्हें फिक्स करना आसान था।
अंडरडाउन के अनुसार , लोग हमेशा क्रिकेट पर सट्टा लगाते थे विशेषकर ड्यूक, राजा और लार्ड्स जो देश चलाते थे। लेकिन बेईमानी या किसी हद तक मैच फिक्सिंग के कुछ आरोप भी लगे थे। अंडरडाउन के अनुसार 1857 में इंग्लैंड और नाटिंघम के बीच खेले गए मैच में कुछ खिलाडियों ने जानबूझकर लचर प्रदर्शन किया था। इनमें विलियम लैंबार्ट भी शामिल थे जिन्हें उस काल का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज माना जाता था। लैंबार्ट दुनिया के पहले ऐसे त्रि*केटर थे, जिन पर मैच फिक्सिंग के लिए प्रतिबंध लगा था। वह पहले ऐसे बल्लेबाज भी थे जिन्होंने पहली बार एक मैच की दोनों पारियों में शतक जमाया था।
दागी खिलाडियों संग नहीं खेलेगा इंग्लैंड
पाकिस्तानी खिलाडियों के फिक्सिंग में शामिल होने की खबरों के बाद इंग्लैंड टीम ने पाकिस्तान के साथ मैच खेलने पर आपत्ति जताई है। मीडिया में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक इंग्लैंड के प्रोफेशनल क्रिकेटर्स संघ के अध्यक्ष एंगस पोर्टर ने कहा है कि अगर दागी खिलाडी आगे के मैच में नहीं खेलते तो क्रिकेट के लिए अच्छा होता। हालांकि पीसीबी अधिकारी का कहना है कि अब तक इन खिलाडियों के खिलाफ कोई भी मामला दर्ज नहीं किया गया है और ये खिलाडी आगे आने वाले वन -डे और टी-20 सीरीज के लिए उपलब्ध रहेंगे। |