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श्रीनगर। अलगाववादियों द्वारा प्रायोजित बंद और आंदोलन से जम्मू -कश्मीर का लगभग प्रत्एक क्षेत्र प्रभावित हुआ है। 80 दिन के बंद, कफ्र्यू आदि के दौरान घाटी की अर्थव्यवस्था को 21,000 करोड रुपए से अधिक का नुकसान हुआ।
कई हुए बेरोजगार
बंद आदि से पर्यटन , हस्तशिल्प और छोटे-मोटे सभी उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। कई जमीजमाई या नई कंपनियों, होटलों और रेस्तरांओं ने लंबे समय से जारी आंदोलन की वजह से अपने बहुत से कर्मचारियों की छुट्टी कर दी है। कश्मीर चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री केसीसीआई के अध्यक्ष नजीर दार ने कहा कि हमारे पास अभी इसके पूरे आंकडे नहीं हैं। पर होटल और रेस्तरां क्षेत्र के अलावा ट्रैवल क्षेत्र में छंटनियां हुई हैं। दार ने कहा कि आमतौर पर होटल उद्योग सर्दियों में पर्यटकों की संख्या घटने के कारण कर्मचारियों की संख्या में कमी कर देते हैं, पर इस बार तो जुलाई के पीक सीजन में ही कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
रोजाना 100 करोड रुपए का घाटा
कश्मीर के कारोबारी समुदाय को हुए नुकसान के बारे में पूछे जाने पर केसीसीआई के अध्यक्ष ने कहा कि औसतन रोज 100 करोड रुपए का घाटा हुआ है। दार ने कहा कि राज्य में सभी स्थाई शांति स्थापित हो सकती है, जब भारत सरकार गतिरोध को दूर करने के लिए पुख्ता कदम उठाए।
अनंतनाग को छोड शेष घाटी कफ्र्यू मुक्त
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग को छोडकर शेष घाटी से कफ्र्यू हटा लिया गया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि अनंतनाग में कानून व्यवस्था भंग होने की आशंका को देखते हुए कफ्र्यू नहीं हटाया गया। यहां 30 अगस्त को कथित तौर पर सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक युवक मारा गया था। सैयद अली शाह गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत कांफ्रेंस के कट्टरपंथी धडे ने प्रदर्शन कार्यक्रम रद्द कर दिया।
जिसके चलते पूरी घाटी में आम जनजीवन सामान्य हो गया है। बुधवार सुबह चार दिनों से बंद दुकानें और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुले। स्कूलों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में भी सामान्य तौर पर कामकाज हो रहा है। बैंकों और एटीएम के बाहर लोगों की लंबी कतारें दिखीं। हालांकि श्रीनगर के मैसूमा में प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। यहां 30 अगस्त को एक पुलिसकर्मी की गोलीबारी में एक युवक की मौत हो गई थी, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया था। |