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महिला दिवस के अवसर पर मैट्रो थाना हबीबगंज में शुरू की गई महिला हेल्प लाइन में मामलों को सुलझाने के लिए न तो तकनीकी स्टॉफ है और न पर्याप्त संसाधन। यहां आने वाले अधिकतर मामले मोबाइल पर अश्लील एसएमएस और कॉल्स से संबंधित होते हैं। ऐसे में बिना संसाधनों के हेल्प लाइन अपने उद्देश्यों को कब तक पूरा कर पाएगी ?
भोपाल। महिलाओं की सुरक्षा एवं सहायता के लिए करीब छह महीने पहले मैट्रो थाना हबीबगंज में शुरू की गई महिला हेल्प लाइन तकनीकी साधनों की कमी से जूझ रही है। इसमें कोई टेक्नीकल स्टाफ नहीं है। महिला हेल्पलाइन को स्वयं मदद की दरकार है। वित्तीय कमी के चलते इसमें आधुनिक संसाधनों के नाम पर भी कुछ नहीं है। एक कम्प्यूटर और लैंडलाइन फोन के भरोसे संचालित हो रही है। यहां पर जो भी मामले आ रहे हैं उनको क्राइम ब्रांच और सायबर सेल की मदद से ही सुलझाए जा रहे हैं। इस कारण मामलों को सुलझने भी विलंब होता है। महिला दिवस के अवसर पर सीएम ने 8 मार्च को मैट्रो थाने में महिला हेल्प लाइन का शुभारंभ किया था।
कौन कौन से आते हैं मामले
महिला हेल्प लाइन में अधिकांशतः मामले छेडछाड , प्रताडना और अश्लील एसएमएस, एमएमएस से संबंधित होते हैं। मार्च से अगस्त माह तक कुल 284 मामले आए हैं, जो अधिकतर मोबाइल पर अश्लील एसएमएस और कॉल्स से संबंधित है। इसमें 13 मामले पेडिंग में है।
कतराती हैं महिलाएं
महिलाएं हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत तो कर देती हैं लेकिन थाने में एफआईआर करवाने में डरती हैं। जिसका नतीजा यह है कि कुल 240 मामलों में केवल 8 में ही एफआईआर दर्ज कराने की हिम्मत दिखाई। बाकी मामलों में समझौता हो गया।
क्राइम ब्रांच व सायबर सेल पर निर्भर
महिला हेल्प लाइन में मामलों को सुलझाने के लिए न तो तकनीकी स्टाफ और न पर्याप्त संसाधन। इसके अधिकतर मामले मोबाइल और अन्य तकनीकी जरूरतों से जुडे होते हैं , जिनको साल्व करने के लिए हेल्पलाइन वालों को क्राइम ब्रांच और सायबर सेल पर निर्भर रहना पडता है। सेल ही आईडी की लोकेशन, टावर लोकेशन ,कंपनी नंबर को ट्रेस करने की जानकारी कलेक्ट करके महिला हेल्पलाइन पुलिस को भेजती है तब जाकर मामले का समाधान हो पाता है। |