जोहानिसबर्ग। आईसीसी के मुख्य कार्यकारी हारून लोर्गट ने कहा कि अगर पाकिस्तान के तीन क्रिकेटरों के खिलाफ ‘स्पॉट फिक्सिंग’ के आरोप सही साबित होते हैं तो वह ‘निरुत्तर’ हो जाएंगे। उन्होंने हालांकि इस आलोचना को खारिज कर दिया कि इस प्रकरण से खेल में भ*ष्टाचार से निपटने की वैश्विक संस्था की विफलता उजागर हुई है। ‘स्पॉट फिक्सिंग’प्रकरण के बीच संक्षिप्त समय के लिए देश लौटने वाले लोर्गट ने केपटाउन इवाई अड्डे पर कहा कि इस तरह के मामलों से बचने के लिए खिलाडियों को मदद करनी होगी।
भ*ष्टाचारी लोगों की पहचान की
लोर्गट ने मंगलवार को देर रात कहा कि हमने भ*ष्टाचारी लोगों की पहचान की है और खिलाडियों को उनसे दूर रहने की सलाह दी है। उन्हें हमारी बात सुननी होगी और अनुशासन में रहना होगा। लोर्गट ने कहा कि सट्टेबाजी पर रोक लगाना आईसीसी का काम नहीं है और वह सिर्फ खिलाडियों और अधिकारियों को इससे दूर रहने के लिए कह सकता है। लोर्गट ने कहा कि सट्टेबाजी गतिविधियां चलती रहेंगी लेकिन हमारी चिंता तब है जब खिलाडी और मैच अधिकारी इससे जुडे हों। खेल के बाहर जो होता उसमें हमारी दिलचस्पी नहीं है लेकिन इसे खेल से दूर रखने के लिए हम हरसंभव प्रयास करेंगे। लोर्गट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि पाकिस्तान और आस्ट्रेलिया के बीच सिडनी में खेला गया। टेस्ट मैच फिक्स था जैसा कि सट्टेबाज मजहर मजीद ने दावा किया है।
यह पूछने पर कि मैच फिक्सिंग के दोषी क्रिकेटरों के पर आजीवन प्रतिबंध उपयुक्त सजा होगी, लोर्गट ने कहा कि आईसीसी (मैच फिक्सिंग या स्पॉट फिक्सिंग) दोषियों के खिलाफ कोई नरमी नहीं दिखाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे ऊपर जिम्मेदारी है कि खेल पर भरोसा फिर बनाया जाए। अगर जरूरत पडी तो हमें अतिरिक्त कदम भी उठाने होंगे लेकिन सुनिश्चित करना होगा कि इस भरोसा को दोबारा बनाने के लिए आईसीसी हरसंभव प्रयास करेगा। |