ग्वालियर। पुलिस को सूचना मिली थी कि शिवपुरी लिंक रोड स्थित संत आसाराम बापू के आश्रम के सामने धर्मकांटे के पीछे एक गोदाम में नकली सीमेंट की बोरियां रखी हुई है। इस सूचना पर पुलिस की एक टीम ने गोदाम पर दबिश दी तो गोदाम में बांगर, प्रिज्म और माईसेम नाम की कंपनियों की सीमेंट की बोरियां रखी हुई मिली। सीमेंट के कारोबारी का नाम वैभव श्रीवास्तव निवासी दानाओली है जिसने विनीत शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा का गोदाम ले रखा था। पुलिस को गोदाम में लगभग ढाई सौ सीमट की बोरियां रखी हुई मिली है। बताया जाता है कि वैभव ने बांगर सीमेंट कंपनी की डीलरशिप ले रखी है, लेकिन गोदाम में माईसेम, प्रिज्म, वैंगुर कंपनी की सीमट की बोरियां भी रखी हुइ थी। कुल मिलाकर गोदाम में सीमेंट का गोरखधंधा चल रहा था। फिलहाल पुलिस वैभव को पूछताछ के लिए थाने ले आई है। जहां कागजों की जांच पडताल सहित अन्य जानकारियों एकत्रित की जा रही है।
सस्ते दामों में बेचते थेः सीमट की असली बोरी जिस दाम में मिलती है, उसके कुछ कम दामों में यह लोग सीमट की बोरियां बेचते थे। ग्राहकों को लगता था कि कम दाम में सीमट की बोरी मिल रही है,इसलिए वह इन बोरियों को खरीद लेते थे। जबकि इस कारोबारी को इसमें काफी फायदा होता था।
कारोबारी का तर्कः इस नकली सीमेंट के कारोबारी वैभव श्रीवास्तव का कहना है कि वह रैक से उन सीमट की बोरियों को लाता था, जिन्हें रिजेक्ट कर दिया जाता था। वह अपने गोदाम पर इन बोरियों को लाकर उनमें जो डेले से पड जाते थे उन्हें फूटवाता और बारीक कर सीमेंट में मिला देता था।
पीसीआर ने दिखाई सतर्कताः बताया जाता है कि पीसीआर 3 में तैनात वीरेन्द्र सिंह नरवरिया, अरविंद तोमर व अशोक को सूचना मिली तो उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी। उसके बाद गोदाम पर छापामार कार्रवाई की गई। इस तरह पीसीआर की सतर्कता से यह नकली सीमेंट पकडाई।
आधा खाका आधा सीमेंटः मिलावट करने यह खाका का इस्तेमाल करते थे। चूंकि खाका सीमट की तरह ही दिखाई देता है, इसलिए आसानी से सीमट में मिल जाता है। मिलावट के लिए खाके को अच्छे से छान लेते थे, जब धूल जैसा खाका रह जाता उसे सीमट की बोरी में मिला देते थे। सीमट की बोरी को एक तरफ से कट करते थे ताकि कोई पहचान न सके। |