ग्वालियर। नगर निगम में वर्तमान में नियम-कायदे को ताक पर रखकर काम हो रहे हैं। पहले बिना परिषद की स्वीकृति के ग्रीन बेल्ट योजना में संभागीय हाट-बाजार का निर्माण कराया और उसके बाद यही गलती जनमित्र समाधान केन्द्र खोले जाने के मामले में की गई। दोनों ही मामलों में नगर निगम आयुक्त को शर्मिंदगी झेलनी पडी।
जनमित्र समाधान केन्द्र
शहर में खोले जा रहे 14जनमित्र केन्द्रों के खोले जाने के मामले में भी नगर निगम आयुक्त नरेन्द्र बहादुर सिंह राजपूत को शर्मिंदगी का सामना करना पडा। परिषद में इस बात को लेकर विपक्ष ने ऐसा हंगामा बरपाया कि निगमायुक्त के साथ-साथ सत्ता पक्ष भी दहल गया। हंगामे का असर यह हुआ कि निगमायुक्त को जनमित्र केन्द्र प्रारंभ होने की समय-सीमा आगे खिसकानी पडी।
इस मामले को लेकर महापौर के शासकीय आवास पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई गई जिसमें सैद्धांतिक निर्णय लिया गया कि यह जनता क ी परेशानियों को दूर करने के लिए है इसलिए यह प्रारंभ होने दें। बैठक के बाद कांग्रेस के कुछ पार्षद भडक गए और उन्होंने इसकी शिकायत कि जिस मसले को लेकर पूरी पार्टी ने परिषद से लेकर सडक तक हंगामा किया उसी मसले पर कुछ लोगों ने कैसे अपनी स्वीकृति दे दी। इन सबको देखते हुए महापौर ने भी निर्देशित किया कि पहले मामला परिषद में लाया जाए और स्वीकृति होने के बाद ही यह केन्द्र प्रारभ किए जाएं।
पहले क्यों नहीं सोचा गया ः नगर निगम आयुक्त नरेन्द्र बहादुर सिंह राजपूत ने इन मामलों में किसी प्रकार की बुद्धिमता का परिचय नहीं दिया। उन्होंने बिना सोचे समझे ही निर्णय ले लिए और बाद में दोनों ही मामलों में अपनी किरकिरी करा बैठे। अगर पहले ही यह सब सोच-विचार कर निर्णय लिए गए होते तो यूं शर्मशार न होना पडता।
हाट बाजार का मामला
परिषद की बिना स्वीकृति के ही नगर निगम ने ग्रीन बेल्ट योजना के तहत आने वाली जमीन को जिला पंचायत के सुपुर्द कर दिया। यहां डेढ वर्ष में लगभग सवा करोड रुपए की लागत से संभागीय हाट बाजार का निर्माण किया गया।
जब विपक्ष को यह बात पता चली तो विपक्ष ने परिषद से लेकर सडक तक हंगामा खडा कर दिया। हंगामा इस बात को लेकर था कि बिना परिषद के संज्ञान में लाए निगम की जमीन कैसे दे दी गई और ग्रीन बेल्ट में पक्का निर्माण कैसे हो गया। |