उत्तरप्रदेश के वोटरों ने कमाल कर दिया*प्रणबदा की नींद उड़ने का कारण वाजिब*किसानों की तकलीफ समझें सरकारें*ओप्रा क्या जानें लाल बत्ती लांघने का सुख*मैकाले के मानसपुत्रों के चंगुल में देश*अपोलो टायर्स का मुनाफा 19 प्रतिशत घटा*हीरा निर्यातकों ने की कर ढांचा सरल बनाने की मांग*मुनाफावसूली से सोना, चांदी कमजोर*सेंसेक्स 123 अंक व निफ्टी 44 अंक उछला*निर्यात कम आयात ज्यादा*
मंत्री ने अपने क्षेत्र में बंद कराई बिजली, रोका अखबार
महानायक अमिताभ बच्चन बीमार, कल होगी पेट की सर्जरी
अज्ञात हत्यारे ने मासूम की पत्थर मारकर हत्या की !
मिल सकता है पीजी डिग्री के साथ नौकरी का अवसर
मुख्यपृष्ठ राष्ट्रीय विश्व शहर  व्यापार खेल मनोरंजन शिक्षा सम्पादकीय क्लासिफाइड Appointment पत्रिकाएँ आज का पंचांग
चीन को जवाब देने की पूरी है तैयारी
On 9/2/2010 8:05:07 PM

Change font size:A | A

Print

E-mail

Comments

Rating

Bookmark

बहुत देर बाद भारत सरकार चीन के राजनयिक हमले और भारतीय सेना के एक सबसे बडे अधिकारी बीएस जसवाल के अपमान पर जागी है, तो भी कहानी कुछ उलझी हुई है। चीन ने जम्मू और कश्मीर को विवादित इलाका बताकर जनरल जसवाल को चीन आने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, लेकिन भारत सरकार ने जो निष्कर्ष निकाला है, उसके अनुसार चीन अरुणाचल प्रदेश पर दावेदारी के लिए जम्मू कश्मीर के नाम का बस इस्तेमाल कर रहा है, इसलिए चीन के इरादों को उसी संदर्भ में समझा जाना चाहिए।

भारत सरकार ने तमाम बैठकों, गुप्त वार्ताओं, पुराने रिकार्डों को पढने और चीन के पिछले बीस साल के इतिहास को देखने के बाद यह तय किया है कि चीन पंचशील के रास्ते पर तो नहीं ही चल रहा, बल्कि भारत के अरुणाचल और लद्दाख के इलाकों पर अपनी दावेदारी जताने और कब्जा करने की पूरी कोशिश कर रहा है। इतने दिनों तक मनमोहन सिंह की सरकार खामोश थी, लेकिन कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटीज की लंबी बैठक के बाद अब यह तय किया गया है कि चीन से हर मोर्चे पर निपटना होगा और अगर चीन अरुणाचल प्रदेश की बात करता है, तो भारत को भी तिब्बत की बात करनी होगी।

जैसे बच्चे कंचे खेलते हैं और आपस में झगडा होने पर एक-दूसरे को उनके माता-पिता से शिकायत करने की धमकी देते हैं, लगभग उसी अंदाज में भारत सरकार अब चीन के एक-एक कदम पर टिप्पणी कर रही है। भारत ने सबसे पहले तो चीन और पाकिस्तान के बीच परमाणु सहयोग को मुद्दा बनाने का फैसला किया है और इसे सार्वजनिक करने का भी फैसला किया है। भारतीय सेना की गुप्तचर शाखा के पास पाकिस्तान में बने एटमी संयंत्रों का पूरा विवरण है व उनके सेटेलाइट फोटो भी हैं।

यह कम महत्वपूर्ण नहीं है कि रक्षा मंत्री एके एंटनी चीन के पडौसी और उससे लगभग हर मुद्दे पर भिडने वाले दक्षिण कोरिया के दौरे पर निकल गए हैं और इस दौरे में उनके साथ सेना का एक तगडा प्रतिनिधि मंडल भी है। यह भारत का चीन को सीधा संदेश है कि अगर तुम हमें घेरोगे, तो घेरना हमें भी आता है। सब जानते हैं कि चीन श्रीलंका, म्यांमार, मालदीव, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के अपने सैन्य अड्डों के जरिए भारत पर सामरिक दबाव बनाना चाहता है। दक्षिण कोरिया और कंबोडिया को अगर भारत ने समर्थन और सहयोग देना शुरू कर दिया, तो चीन अपने पडौस में ही उलझकर रह जाएगा। कम से कम भारत सरकार की रणनीति यही लगती है। भारत ने अब यह भी तय कर लिया है कि फिलहाल चीन से किसी किस्म का कोई सैनिक रिश्ता नहीं रखना है। चीन के जो सैन्य अधिकारी भारत आकर जनरल जसवाल के अपमान का मामला सुलझाना चाहते थे, उनका तो नाम भी किसी को पता नहीं, पर उन्हें हम वीजा नहीं देंगे।

विदेश मंत्रालय के अधिकारी बताते हैं कि चीन के राजदूत को विदेश मंत्रालय बुलाकर विदेश सचिव निरूपमा राव ने खुले शब्दों में कह दिया है कि जो चीन ने किया है, उसका स्वाभाविक परिणाम तो यही होता कि भारत चीन से अपने राजनयिक रिश्ते हमेशा के लिए खत्म कर लेता, लेकिन फिलहाल भारत चीन को सुधरने का एक मौका और देना चाहता है। भारत और चीन के बीच लगभग बारह हजार करोड डालर के अलग-अलग सैनिक और नागरिक सौदे प्रस्तावित हैं और कुछ दिनों पहले तक हमारे भोले-भाले देश को यह उम्मीद थी कि चीन से दोस्ती करके एशिया में अमेरिका के वर्चस्व को रोका जा सकेगा, मगर चीन इतना कच्चा खिलाडी नहीं है। सबसे पहली और सबसे बडी बात तो यही है कि खुद चीन भारत की बढती आर्थिक और सामरिक ताकत से परेशान है। चीन को यह बताने की जरूरत नहीं है कि भारत को पाकिस्तान की तरह लॉलीपॉप देकर न तो बहलाया जा सकता है और न ही कब्जे में किया जा सकता है।

सस्ते मोबाइल फोन और खिलौनों के जरिए भारतीय बाजार के एक हिस्से पर काबू भले ही कर लिया गया हो, पर भारत पाकिस्तान तो नहीं ही है। यदि भारत अपने कुटीर उद्योगों पर उतना ध्यान देता, जितना उसे देना चाहिए था, तो आज हम चीन को शतरंज से लेकर ताश के पत्ते तक बेच रहे होते। चीन एशिया की महाशक्ति है, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता, लेकिन भारत भी किसी इतवारी हाट में मूंगफली बेचने वाला देश नहीं है। यह सही है कि हम मार खाते हैं, तो अपने राजनीतिज्ञों के चारित्रिक पतन के कारण, जिन्हें किसी भी कीमत पर और खासतौर पर देश की कीमत पर भी अपने खजाने भरने में कोई एतराज नहीं होता। यही वजह है कि हमारी सेना के पास और खासतौर पर नौसेना के पास ढंग के जहाज भी नहीं हैं और एटॉमिक पनडुब्बी अरिहंत बनाई तो गई है, पर उसे चलाने वाले रिएक्टर आमतौर पर खराब हो जाते हैं। वायुसेना के पास अच्छे जहाजों की कमी है और थलसेना के पास पिछले 18 सालों से कोई नई और ताकतवर तोप नहीं आई है। यह सब तब है, जब भारत का रक्षा बजट भारत के शिक्षा बजट से भी ज्यादा है, बहुत ज्यादा।

फिर भी, चीन से न तो हमें घबराने की जरूरत है और न ही आतंकित होने की। अगर घबराना ही है, तो हमें अपने देश की सरकार से ही घबराना चाहिए, जिसे अपने देश का अपमान इतना मामूली लगा कि उसका प्रतिकार कैसे किया जाए, यह तय करने में ही बहुत वक्त बीत गया? चीन की सबसे बडी ताकत उसकी अर्थव्यवस्था नहीं है। गरीबी की रेखा के नीचे वहां भी लोग रहते हैं, लेकिन यह सच दुनिया के सामने नहीं आ पाता। दुनिया को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के फोटो और वीडियो ही दिखाए जाते हैं, जिनमें बौने सैनिक कलाबाजियां करते दिखाई पडते हैं।

इस समय बहुत जरूरत इस बात की भी है कि चीन को यह अहसास कराया जाए कि 1962 और 2010 में बहुत फर्क है। एक तो हमें पता चल चुका है कि बौद्ध धर्म के मानने वालों का समाज होने के बावजूद चीन कोई सत्यवादी देश नहीं है। वह हमें भाई कहकर हमारी पीठ में छुरा भी घोंप सकता है। दूसरे, यह भी पता चल चुका है कि भौगोलिक तौर पर जिन-जिन देशों के जरिए चीन भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है, उनमें से केवल एक म्यांमार को छोड दें, तो सबके सब अमेरिका के आर्थिक गुलाम हैं। हमें अमेरिका को थोडी-सी सुविधाएं और उसके कार्यक्रमों के लिए आधार देना है, तो चीन के ये पिछलग्गू तो अपने आप सीधे हो जाएंगे। अमेरिका पता नहीं कब से कोशिश कर रहा है कि भारत उसका दोस्त बन जाए? भारत में अब तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रतिपक्ष भाजपा, दोनों ही अमेरिका के प्रति प्रेमभाव रखते हैं और अमेरिका के लगभग पूरे समाज और तंत्र में भी भारत इतना प्रभावी है कि दोस्ती आसानी से निभ सकती है। अमेरिका से निकटता बढाई जाए और दक्षिण कोरिया, ताइवान और कंबोडिया को अपने हाथ में ले लिया जाए, तो सब ठीक हो जाएगा। भारत यही कर भी रहा है।

--आलोक तोमर

Post Comments
More News
मैकाले के मानसपुत्रों के चंग...
ओप्रा क्या जानें लाल बत्ती ल...
किसानों की तकलीफ समझें सरकार...
प्रणबदा की नींद उड़ने का कार...
उत्तरप्रदेश के वोटरों ने कमा...
क्रांति की उपलब्धियों को खो ...
चल रहा आश्वासन बांटने का अभि...
नाम, नमक और निशान के मायने...
मालदीव में सैनिक शासन की आहट...
मंत्रियों को यह सजा तो पर्या...
टाइम की आपत्ति को तवज्जो क्य...
पाकिस्तान की कश्मीर नीति में...
चल भी सकता है प्रियंका का जा...
हे फेसबुकजी, तुम्हें ढेरों श...
अमेरिका ने गंवा दिया एक बढ़ि...
 सम्पर्क करें  विज्ञापन दरें आपके सुझाव संस्थान
© Copyright of Rajexpess 2009,all right reserved.
Developed & Designed By: