| | बीसीसीआई से शिक्षा ले क्रिकेट-जगत | | | |
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आखिर , भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने हमारे क्रिकेटरों के लिए नई आचार संहिता बना ही दी। लॉर्ड्स मैच फिक्सिंग मामले ने क्रिकेट की दुनिया में जो भूचाल पैदा किया, उसके बाद बीसीसीआई को कुछ तो ऐसा करना ही था, जिससे भारतीय क्रिकेटरों के दामन पर दाग लगने की सारी दूरगामी आशंकाएं दूर हो जाएं। मानना पडेगा कि बीसीसीआई ने बहुत कठोर आचार संहिता बनाई है। इसके बाद न तो खिलाडी किसी से मिल सकेंगे, न खिलाडियों से भी कोई मिल सकेगा। उनकी बीवियों को बिना रोक-टोक आने-जाने की अनुमति जरूर दी गई है, पर अन्य लोग टीम प्रबंधन की अनुमति के बिना क्रिकेटरों से नहीं मिल पाएंगे। दावतों व पार्टीबाजी पर भी रोक लगा दी गई है। विदेशी दौरों में केवल भारतीय उच्चायोगों की ओर से आयोजित भोज में ही टीम शामिल हो सकेगी। नियम यह भी बना दिया गया है कि यदि कोई खिलाडी आचार संहिता का उल्लंघन करता है, तो टीम प्रबंधक उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। विदेशी दौरों के दौरान इन नियमों को लांघने वाले खिलाडियों को स्वदेश वापस भेजने का अधिकार भी प्रबंधक के पास होगा।
मतलब , बीसीसीआई ने अपनी ओर से फिक्सिंग की सारी आशंकाओं को निर्मूल कर दिया है। मोहम्मद अजहरुद्दीन और अजय जडेजा जैसे क्रिकेटरों ने अपनी करतूतों से टीम इंडिया को जो नीचा दिखाया था, उसका खामियाजा हमारे वर्तमान क्रिकेटरों को भोगना पड रहा है, अपनी स्वतंत्रता खोकर। इसके बावजूद बीसीसीआई का यह प्रयास गलत नहीं है। इससे आईसीसी भी प्रेरणा ले और क्रिकेट की दुनिया के सभी देशों के बोर्डों-संघों को ऐसी ही कठोर आचार संहिता बनाने के लिए बाध्य करे। खिलाडी फिक्सरों के साथ मिलकर क्रिकेट-प्रेमियों के साथ जो कपट करते हैं, उस पर रोक लगाने के लिए कठोरता बेहद जरूरी है। |
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