| | क्या वीआईपी को ही काटते हैं मच्छर? | | | |
| | | | |
| | |
भोपाल। मलेरिया , वायरल फीवर, डेंगू और स्वाइन फ्लू जैसे घातक रोगों से निपटने के लिए नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सजग नहीं है। शहर में हर जगह गंदगी, कीचड और मच्छर महामारी को और बढा रहे ह।
मच्छरों को खत्म करने की फॉगिंग मशीनें वर्कशाप में धूल खा रही ह। संबंधित अफसर तो यह भी बताने को तैयार नहीं हैं कि इस मद में खर्च होने वाली राशि कब और कहां इस्तेमाल हो रही है।
आबादी 22 लाख, मशीनें सिर्फ नौ
राजधानी की आबादी 22 लाख के करीब है जबकि नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के पास कुल जमा नौ फॉगिंग मशीनें चालू हालत में हैं। एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नगर निगम के पास एक दर्जन से अधिक फॉगिंग मशीनें हैं, लेकिन अधिकतर की हालत खस्ता है। इनमें से सिर्फ तीन मशीनों को ही कभी-कभी दवा के छिडकाव के लिए निकाला जाता है।
फाइलों तक सिमटा चार्ट
नियमानुसार मच्छरों का सफाया करने के लिए फॉगिंग मशीन से धुआं छोडने के लिए साप्ताहिक चार्ट बनाया जाता है। प्रतिदिन के हिसाब से फॉगिंग मशीन को शहर के कोने -कोने में जाकर धुआं छोडना होता है। लेकिन इन दिनों साप्ताहिक चार्ट तो बनाया जाता है पर वह सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रहता है। आम जनता को उन क्षेत्रों में फॉगिंग मशीनें धुआं छोडती नजर नहीं आतीं जहां गंदगी व मच्छरों की भरमार है।
गली -कूचों के हाल-बेहाल
नए और पुराने शहर के कई इलाकों में गंदगी और कचरे के कारण मच्छरों का प्रकोप है , लेकिन यहां न तो हाथ वाली फॉगिंग मशीन और न ही चार पहिया वाहन वाली फॉगिंग मशीन धुआं छोडती नजर आती है। जबकि माता मंदिर स्थित नगर निगम के वर्कशॉप समेत शहर के कई स्थानों पर करीब एक दर्जन हाथ वाली फॉगिंग मशीनें धूल खा रही हैं।
सिर्फ वीआईपी के लिए इस्तेमाल
सूत्रों का कहना है कि फॉगिंग मशीनें सिर्फ मुख्यमंत्री निवास , चार बंगला, अरेरा कालोनी, चौहत्तर बंगला और लिंक रोड स्थित मंत्रियों के बंगलों के आसपास ही मंडराती नजर आती हैं।
बजट का नहीं ब्यौरा
मच्छरों का नाश करने वाली फॉगिंग मशीन पर खर्च होने वाले बजट के बारे में कोई भी अधिकारी जानकारी देने को तैयार नहीं हुआ। जिस भी अधिकारी से इस संबंध में बात की गई उसने मेरा विभाग नहीं होने की बात कह कर दूसरे अधिकारी का नाम बता दिया। कई अधिकारियों ने अपने मोबाइल फोन ही बंद कर लिए। |
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
|
| |
| |