| | इन हालात में आगे काम कर पाना मुश्किलः ब्रासा | | | |
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नई दिल्ली। अपनी तनख्वाह को लेकर साइ पर ‘सरासर झूठ’ बोलने का आरोप लगाते हुए भारतीय हॉकी टीम के मुख्य कोच जोस ब्रासा ने कहा है कि इन हालात में उनके लिए आगे काम करना मुश्किल है और वह 30 नवंबर को खत्म होने वाले अनुबंध के नवीनीकरण की तमन्ना नहीं रखते। भारतीय खेल प्राधिकरण और हॉकी इंडिया पर गुलामों की तरह बर्ताव करने का आरोप लगा चुके ब्रासा ने कहा कि साइ ने कहा है कि मुझे सात लाख रुपए वेतन दिया जा रहा है जो सरासर झूठ है।
मेरी तनख्वाह चार लाख 20 हजार रुपए यानी 7000 यूरो है जो यूरोप में किसी भी साधारण क्लब के कोच को मिलती है। इस स्पेनिश कोच ने कहा कि इसके अलावा मेरे रहने के इंतजाम की बात भी झूठ है। मैं उनके द्वारा मुहैया कराए जाने वाले चार सितारा होटल में नहीं ठहरता यानी करीब तीन लाख रुपए महीने वैसे भी बच रहे हैं। व्यवस्था से परेशान ब्रासा ने कहा कि इन हालात में उनके लिए एशियाड के बाद काम कर पाना मुश्किल होगा हालांकि उन्होंने इसका खुलासा नहीं किया कि उन्हें किसी और देश से पेशकश मिली है या नहीं। उन्होंने कहा कि यह गोपनीय है। मैं फिलहाल ना तो इसका खंडन करूंगा और ना ही पुष्टि। एक बात तो तय है कि इन हालात में 30 नवंबर के बाद मैं यहां काम नहीं कर सकता।
हालांकि मुझे भारतीय टीम से बहुत प्यार है। लेकिन मुझे उतना ही यकीन इस बात का भी है कि साइ भी नहीं चाहता कि मैं यहां रहूं। पिछले साल भारतीय टीम से जुडे ब्रासा का कार्यकाल 30 नवंबर को समाप्त हो रहा है लेकिन उससे पहले भारत को राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाड में भाग लेना है। राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के लिए 15 सितंबर के बाद दिल्ली के नेशनल स्टेडियम पर अभ्यास की मांग दोहराते हुए ब्रासा ने कहा कि घरेलू हालात में खेलने का फायदा तभी मिल सकेगा। पदक की उम्मीदों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि इस बारे में कुछ भी कयास लगाना मुश्किल है। हम कोशिश करेंगे कि विश्व कप की नाकामी का गम दूर कर सकें। उन्होंने बताया कि एशियाई खेलों से पहले ग्वांगझू में सुविधाओं का जायजा लेने और अभ्यास के लिए टीम इस महीने पांच-छह दिन के लिए चीन जा सकती है। ब्रासा ने कहा कि मार्च में विश्व कप के बाद यह तय हुआ था कि एशियाड और राष्ट्रमंडल खेलों से पहले हम ग्वांगझू जाकर वहां की पिच और बाकी सुविधाओं का जायजा लेंगे ताकि उसी तरह की पिच पर यहां अभ्यास कर सकें। उम्मीद है कि हम इस महीने 22 खिलाडियों के साथ पांच छह दिन के लिए वहां जाएंगे। अप्रैल में अजलन शाह कप के दौरान एशियाई असैम्बली में चीनी हॉकी महासंघ और हॉकी इंडिया के बीच इस संदर्भ में सहमति बनी थी। अपने कार्यकाल के दौरान तमाम विवादों और सुविधाओं की कमी से जूझते रहे ब्रासा को भारतीय हॉकी और खिलाडियों से लगाव है और उनका मानना है कि टीम का भविष्य उज्जवल है। उन्होंने कहा कि भारतीय खिलाडी काफी मेहनती हैं और सीखने को तत्पर भी। इनमें प्रतिभा की कमी नहीं है। बस व्यवस्था दुरूस्त होने की जरूरत है। यह पूछने पर कि क्या वह बतौर कोच संतुष्ट हैं, उन्होंने कहा कि मैं हमेशा खुश रहता हूं। मेरा काम अपने फर्ज को बखूबी अंजाम देना है जो मैं कर रहा हूं। |
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