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गैर-वाजिब नहीं चिदंबरम की चिंता
On 9/3/2010 8:44:52 PM

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संघ परिवार आजकल केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम के बयान से खफा है। चिदंबरम का कसूर महज इतना है कि उन्होंने दहशतगर्दी के भगवा चेहरे को मुल्क का सबसे बडा दुश्मन बताया था। मालेगांव, मक्का मस्जिद और अजमेर में हुए आतंकी हमलों के संदर्भ में उन्होंने कहा था कि मुल्क में भगवा आतंक का नया आयाम सामने निकलकर आया है। बम विस्फोट की कई घटनाओं में हिंदू चरमपंथियों का नाम सामने आने के बाद जाहिर है कि यह उनकी स्वाभाविक अभिव्यक्ति थी और उनकी इस चिंता पर हम सभी को गंभीरता से विचार करना चाहिए, पर हुआ इसका उल्टा।

आतंकवाद पर आए चिदंबरम के इस बयान पर संघ परिवार ही नहीं, कांग्रेस पार्टी के अंदर भी उनकी आलोचना होने लगी। मानो चिदंबरम ने भगवा आतंकवाद का नाम लेकर कोई गुनाह कर दिया हो? जाहिर है कि चिदंबरम ने जब कोई ऐसा बयान दिया है, तो सोच-समझकर ही दिया होगा। वह देश के गृह मंत्री हैं और उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे मुल्क को आने वाले खतरों से आगाह करें। फिर चिदंबरम के बयान से पहले तमाम जांच एजेंसियां अपनी तहकीकात में यह बात साबित कर चुकी हैं कि मुल्क में बीते कुछ सालों में जो बम विस्फोट हुए, उनमें हिंदू कट्टरपंथी तंजीमों का हाथ है। मालेगांव बम विस्फोट की महज एक तहकीकात ने कई बम विस्फोटों के राजफाश कर दिए। कल तक जो बम विस्फोट जेहादी आतंकवाद के खाते में दर्ज थे, आज उनका लेखा-जोखा बदल गया है। बावजूद इसके संघ परिवार को अपने किए का कोई पछतावा नहीं, बल्कि जब भी इन बम विस्फोटों की साजिशों में हिंदू तंजीमों का नाम आता है, तो वह उन्हें बचाने में लग जाता है। चिदंबरम के बयान पर लोकसभा, राज्यसभा में सबसे ज्यादा मुखर थीं, शिवसेना और भाजपा।

दिसंबर-1992 और जनवरी-1993 में मुंबई में हुए भयानक दंगों के आरोपियों में से एक मनोहर जोशी, बाबरी विध्वंस के आरोपी मुरली मनोहर जोशी और योगी आदित्यनाथ खासतौर पर संसद में भगवा आतंकवाद की पैरवी करते नजर आए। मुरली मनोहर जोशी तो गुस्से में इतने बेकाबू हो गए कि उन्होंने गृह मंत्री को भगवा आतकवाद शब्द के इस्तेमाल पर चेतावनी दे डाली कि मुल्क में इसकी भारी प्रतिक्रिया होगी। कुल मिलाकर जो लोग आज भगवा आतंक के नाम से हिंदू चरमपंथियों को मुखातिब करने में परहेज कर रहे हैं, यह वही लोग हैं, जो अभी तक मुल्क में होने वाली हर आतंकी घटना को मुस्लिम, इस्लामी या जेहादी आतंकवाद का नाम देकर उसे हिंदुस्तानी मुसलमानों से जोड देते थे। फिर संघ परिवार के इस जुमले को भला कौन भूल सकता है कि माना कि सारे मुसलमान आतंकवादी नहीं हैं, पर आतंकी घटनाओं में अब तक जो पकडे गए, वे मुसलमान ही हैं।

दरअसल, गृह मंत्री ने भगवा आतंकवाद शब्द का जिन अर्थों में इस्तेमाल किया, उसके मायने साफ हैं। भगवा आतंकवाद शब्दावली से उनका सीधा-सीधा मतलब कट्टर हिंदूवादी संगठनों से था, जिनके नाम अभी हाल की कई घटनाओं में सामने आए हैं। स्वामी असीमानंद, सुनील जोशी, रामजी कलासांगरा, संदीप डांगे, कर्नल श्रीकांत पुरोहित और अन्य का ताल्लुक किन संगठनों से है, सब जानते हैं। भगवा चोला पहनकर यह दहशतगर्द गुपचुप अपनी मुल्क मुखालिफ गतिविधियों में लगे रहे और जांच एजेंसियां अंधेरे में तीर मारती रहीं। वह तो मालेगांव बम विस्फोट की जांच के बाद जब जांच एजेंसियों ने अपना दायरा हिंदू चरमपंथी संगठनों की ओर बढाया, तब नए राजफाश हुए, वरना मुल्क में दहशतगर्दी की वारदातें और भी होतीं। भगवा आतंकवाद शब्द पर जो लोग एतराज जता रहे हैं, उनकी मंशा साफ है। एक बार फिर वे जज्बाती शब्दों का सहारा लेकर असली मुद्दे को कहीं ओर मोडना चाहते हैं। ये लोग कभी भगवा शब्द को धर्म से जोडते हैं, तो कभी हिंदुओं से। गृह मंत्री ने यदि भगवा आतंकवाद की बात की है, तो पूरी तरह जानते-बूझते। उनका पैगाम साफ है कि आतंकवाद की सख्त मुखालफत और उससे कडा मुकाबला, क्योंकि किसी भी तरह के आतंकवाद की तरफ से आंखे मूंदे रहना मुल्क की सुरक्षा से खेलना है। आतंकवाद, आतंकवाद होता है और उसमें भेद करना हमारे मुल्क के हितों के प्रतिकूल होगा।

--जाहिद खान

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