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डेरा इस्माइल खान। तहरीके तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने बुधवार को लाहौर में शिया समुदाय के जुलूस को निशाना बनाकर किये गये बम विस्फोटों की जिम्मेदारी ली है। इन बम विस्फोटो में 33 लोगों की मौत हो गई थी। टीटीपी के प्रवक्ता कारी हुसैन महसूद ने इस हमले की शुक्रवार को जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि सुन्नी समुदाय के निर्दोष लोगों की हत्या का बदला लेने के लिये ये बम विस्फोट किये गये। लाहौर में हुये आत्मघाती हमले इस ओर इशारा करते हैं कि पहले से ही बाढ की विभीषिका झेल रहे पाकिस्तान को कमजोर करने की यह एक तालिबानी साजिश है। अमेरिका ने पहले ही इसकी चेतावनी दी थी।
कि बाढ के बाद चरमराई व्यवस्था और सरकार के प्रति रोष का फायदा आतंकवादी उठा सकते हैं। पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ से लाखों लोग विस्थापित हो गये हैं और जानमाल को भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ प्रभावितों के लिये सरकार की ओर से राहत एवं बचाव कार्यो में देरी एवं लापरवाही से जनता में काफी गुस्सा है। ऐसे में आतंकवादी संगइनों से संबद्ध इस्लामी धर्मार्थ संगठन का लोगों की मदद के लिए आगे आना एवं लोगों द्वारा इनकी मदद स्वीकार करना भविष्य में काफी खतरनाक साबित हो सकता है। भीतरी एवं बाहरी आतंकवाद पर अंकुश लगाना और बाढ प्रभावितों को राहत पहुंचाना पाकिस्तान सरकार के सामने दो बडी चुनौतियां हैं। |