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चंडीगढ । केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की एक पीठ ने हरियाणा के पूर्व डीजीपी एसपीएस राठौड के एक आवेदन पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। राठौड ने इस आवेदन में अपनी पेंशन निलंबित किए जाने के फैसले को चुनौती दी है। कैट की पीठ ने आदेश में गृह मंत्रालय से 19 अक्टूबर तक जवाब मांगा है। सत्र अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने और 18 माह की सजा सुनाए जाने के बाद गृह मंत्रालय ने 23 जून 2010 को उनकी पेंशन रोक दी थी। राठौड ने कहा है कि मंत्रालय उनके साथ भेदभाव कर रहा है क्योंकि पंजाब के पूर्व डीजीपी केपीएस गिल के मामले में ऐसा आदेश जारी नहीं किया गया था।
राठौड के अनुसार, गिल भी भारतीय दंड संहिता की धारा 354 और 509 के तहत, दंडनीय अपराध के दोषी ठहराए गए थे। राठौड के करीबी सूत्रों के मुताबिक, पूर्व डीजीपी ने तर्क दिया है कि उनका मामला अब तक अंतिम स्थिति में नहीं पहुंचा है, जबकि गिल का मामला 27 जुलाई 2005 को समाप्त हो गया था। उन्होंने यह भी कहा है कि उनकी पेंशन रोकना उनके जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है क्योंकि ऐसा करने से वह अपनी आय के स्रोत से वंचित हो गए हैं। सत्र अदालत ने राठौड (68) की सजा छह माह से बढा कर 18 माह कर दी थी, जिसके बाद 25 मई से वह बुरैल जेल में बंद हैं। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उनकी वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने खुद को दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने को चुनौती दी थी। |