| | दहशत में लोग | | | |
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भोपाल। शहर में सुअरों की शामत आ गई है। रोजाना एक दर्जन से ज्यादा सुअर मर रहे ह। उन्हें कौन -सी बीमारी है, इसका पता नहीं चल पा रहा है। बावजूद इसके विभाग चैन की नींद सोया हुआ है। यही कारण है कि मरने वाले सुअरों की न तो जांच हो रही है और न ही बीमार सुअरों को बचाने की कोई मुहिम चलाई जा रही है।
सुअर पालने वाले भी अपने जानवर मरने की जानकारी छिपा रहे हैं। क्योंकि उन्हें इस बात का डर है कि उनके जानवरों में बीमारी फैलने की जानकारी शासन को लग गई तो सुअरों के घूमने -फिरने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। उन्हें अपने जानवरों की अच्छी कीमतें भी नहीं मिल पाएंगी।
इस मामले में राज एक्सप्रेस ने पडताल की तो शहर में कुछ स्थानों पर सुअरों के मरने की जानकारी सामने आई। शहर में मनुष्यों की बीमारी डेंगू , स्वाइन फ्लू, मलेरिया आदि का जोर चल रहा है। स्वाइन फ्लू को लोग सुअरों की मौत से भी जोड रहे हैं। इससे शहरवासियों में दहशत का माहौल व्याप्त है।
भानपुरा में मिले प्रमाण
सुअरों के मरने की जानकारी नगर निगम और पशुपालन विभाग को भले ही नहीं है , लेकिन भानपुरा खंती में इसके प्रमाण मिले ह। मरने वाले जानवरों को कचरे की गाडी में डालकर वहां पहुंचाया गया है, जहां मरे पशुओं को दफनाने की बजाए उन्हें कचरे में फेंक दिया जाता है।
गोविंदपुरा में रहने वाले राजेन्द्र लाल का कहना है कि पूरे देश में बीमारी फैली है , ऐसे में मैं कैसे बच सकता हूं। उन्होंने कहा कि मेरा कबाडा हो गया है। अब तक 12 जानवर मारे जा चुके ह। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि लोग झूठ बोल रहे ह जबकि जानवर सभी के मर रहे हैं, इसके बाद भी पता नहीं वे क्यों छिपा रहे ह।
छिपाते ह जानकारी
सुअरों के मरने का सिलसिला लगातार जारी है , इसके बाद भी उसके पालक इसकी जानकारी देने से मना करते हैं। गोविंदपुरा क्षेत्र में सुअर पालने वाले राकेश का कहना है कि उनके सभी जानवर स्वस्थ हैं। इसी प्रकार वार्ड 43 के सुरेश का भी कहना है कि बीमारी से उसके कोई जानवर नहीं मरे, जबकि एक अन्य सुअर पालक ने स्वीकार किया कि जानवर बीमारी से मरे ह। |
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