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भोपाल । जिला प्रशासन ने राजधानी में स्वाइन फ्लू पर नजर रखने के लिए जो मॉनीटरिंग कमटी बनाई है, उसमें तहसीलदार स्तर के अधिकारी तो रखे गए हैं, लेकिन एक भी चिकित्सा विशेषज्ञ नहीं होने से कमेटी शहर में कोई मॉनीटरिंग कर पाएगी, इस पर संदेह है। जबकि इन कमेटियों का काम शहर में रिहायसी क्षेत्रों और अस्पताल में स्वाइन फ्लू के बढते केस पर नजर रखना और उपचार की स्थिति देखना है, जबकि मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. एनपी मिश्रा, मेडिको लीगल संस्थान के पूर्व संचालक डॉ. डीके सत्पथी, पूर्व अधीक्षक डॉ. डीके वर्मा, मेडिसिन विभाग अध्यक्ष डॉ. वीके शर्मा, पीएसएम विभाग अध्यक्ष डॉ. डीके पाल सहित अनेक विशेषज्ञ हैं, जो स्वाइन फ्लू की मानीटरिंग में सक्रिय योगदान दे सकते हैं।
मेडिकल आफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ . ललित श्रीवास्तव ने बताया कि यह मामला एक गंभीर बीमारी से जुडा हुआ है, जिससे लगातार मौतें हो रही हैं। ऐसी स्थिति में इसकी मॉनीटरिंग चिकित्सा विशेषज्ञों के अलावा और कोई नहीं कर सकता है। जहां तक प्रशासनिक अधिकारियों का प्रश्न है तो इन्हें मेडिकल की जानकारी कुछ नहीं रहती है।
हर दूसरे - तीसरे दिन होगा निरीक्षण
भोपाल (आरएनएन)। स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए भोपाल जिले में चिह्नित किए गए अस्पतालों का निरीक्षण हर दूसरे-तीसरे दिन होगा।
निरीक्षण के तहत एसडीएम व तहसीलदार अस्पतालों की व्यवस्थाएं देखेंगे तथा स्वाइन फ्लू से बचाव के तरीकों , इलाज के लिए तैयार की गई व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। व्यवस्था दुरुस्त नहीं पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी पर कार्रवाई की जाएगी। यह जानकारी एडीएम रजनीश श्रीवास्तव ने दी। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को एसडीएम व तहसीलदारों के लिए चिह्नित किए गए अस्पतालों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि शनिवार को सभी एसडीएम ने रिपोर्ट सौंप दी है, जो कलेक्टर निकुंज कुमार श्रीवास्तव को पहुंचा दी गई है।
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