पटना। बिहार पुलिस के तीन बंधक रविवार सुबह छोड दिए जाएंगे। माओवादी प्रवक्ता अविनाश ने एक समाचार एजेंसी को फोन पर बताया कि बिहार में बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों को रविवार सुबह 8 बजे तक छोड दिया जाएगा।
प्रवक्ता के मुताबिक बुद्धिजीवियों,आम लोगों और बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों के परिजनों के बार-बार अनुरोध का पर हमारी जोनल कमेटी ने बंधकों को मुक्त करने का फैसला किया है। यह पूछे जाने पर कि दो दिन पहले जिस बंधक पुलिसकर्मी को मार दिए जाने की सूचना माओवादियों की तरफ से आई थी वो गलत क्यों थी, अविनाश ने कहा कि इसके बारे में कमेटी का मेरे पास फोन आया था, लेकिन जहां मैं था वो जगह दूर होने के कारण और लाइन में बाधा की वजह से मैं नाम ठीक से सुन नहीं पाया था और हडबडी में मुझसे ये चूक हो गई, जिसका मुझे बेहद अफसोस है, मैंने मीडिया कर्मियों से माफी भी मांगी है।
तीनों बंधक सुरक्षित
36 घंटे से अधिक की चुप्पी के बाद भाकपा माओवादी के स्वयंभू प्रवक्ता अविनाश ने तीनों बंधक पुलिसकर्मियों के सुरक्षित होने का दावा किया। बिहार के लखीसराय जिले के रामटालनगर गांव के पास गत 29अगस्त को हुई मुठभेड के बाद लापता चार पुलिसकर्मियों के बारे में गत 30अगस्त की शाम को मीडिया को फोनकर अविनाश ने ही उन्हें नक्सलियों द्वारा बंधक बनाने की पुष्टि की थी।
नक्सलियों की गतिविधियों के बारे में अविनाश दो सितंबर की देर शाम तक जानकारी देता रहा,लेकिन उसके बाद उसने चुप्पी साध ली। कल सुबह दस बजे नक्सलियों द्वारा तय की गई नई समय सीमा समाप्त होने के बाद माओवादियों की तरफ से तीन बंधकों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल पाया। पुलिस के बढे हुए तलाशी अभियान के बीच अविनाश ने आज दोपहर एक टीवी चैनल को फोन करके बताया कि बाकी तीनों बंधक पलिसकर्मी सुरक्षित हैं और अपराह्न चार बजे उनकी आवाज सुनाने के साथ ही उनके शारीरिक तौर पर सुरक्षित होने से संबंधित एक सीडी उपलब्ध करा दी जाएगी। अविनाश ने गत दो सितंबर को अपराहन करीब चार बजे यह दावा किया था कि सरकार द्वारा उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिए जाने के कारण बंधक बनाए गए पुलिसकर्मियों में से एक अभय प्रसाद यादव की हत्या कर दी गई है पर पुलिस को लखीसराय जिले के चानन थाना क्षेत्र के सिमरातल्ली कोरासी स्थित एक कच्ची सडक पर एक अन्य बंधक पुलिसकर्मी लुकस टेटे का शव पडा मिला था लेकिन अभय यादव सहित अन्य बंधकों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था।
आमने-सामने वार्ता के लिए सरकार तैयार
सर्वदलीय बैठक में सभी दल के प्रतिनिधियों द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि माओवादी इस मसले पर सरकार से आमने-सामने बातचीत के लिए आएं और बातचीत का परिणाम चाहे जो भी हो उन्हें किसी प्रकार की पुलिस कार्रवाई का सामना नहीं करना पडेगा बल्कि उन्हें सुरक्षित जाने दिया जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश ने भाकपा माओवादी के स्वयंभू प्रवक्ता अविनाश का नाम लिए बिना मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन्होंने टेलीफोन नंबर जारी किया है उनसे मीडिया के लोग बातचीत कर रहे हैं, लेकिन एक तो उन्हें कोई पहचानता नहीं है और दूसरी बात यह कि उसने जो सूचना दी वह गलत साबित हुई। राजद के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि बंधकों में अगर कोई हाई प्रोफाईल व्यक्ति होता तो उसके लिए नियम-कायदा तोडकर तुरंत पहल होती। बैठक में आम राय बनी कि माओवादियों की रिहाई से राज्य में पुलिसकर्मियों का मनोबल गिरेगा।
पकडा गया बंधक प्रकरण का मास्टरमांइड!
पटना। बिहार में नक्सलियों द्वारा बंधक बनाए गए चार पुलिसकर्मियों में बाकी बचे तीन पुलिसकर्मियों की रिहाई के लिए पुलिस ने अपना अभियान तेज कर दिया है। इस बीच, पुलिस ने शनिवार को जमुई जिले से दो नक्सलियों को हिरासत में लिया है। स्थानीय टीवी चैनलों के मुताबिक इनमें से एक प्रमोद कुमार बंधक प्रकरण का मास्टरमाइंड है। हालांकि, पुलिस ने गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं की है। इधर, चौतरफा दबाव के बीच नक्सलियों ने नरम रुख के संकेत दिए हैं। नक्सलियों के स्वयंभू प्रवक्ता अविनाश ने मीडिया को बताया कि वे बिहार सरकार से बातचीत को तैयार हैं।
पीसपीए महासचिव मनोज महतो गिरफ्तार
मेदनीपुर। पश्चिम बंगाल के पश्चिमी मेदनीपुर में संयुक्त बलों ने पुलिस संत्रास जनसंघर्ष समिति (पीसीपीए) के महासचिव मनोज महतो और एक अन्य माओवादी को गिरफ्तार कर बहुत बडी सफलता हासिल की है। पुलिस अधीक्षक मनोज ने शनिवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि लालगढ, सालबोनी तथा कोतवाली थानाक्षेत्र के कुछ हिस्सों में शुक्रवार को पुलिस और अर्द्धसैनिक बल ने मिलकर अभियान चलाया और उसी दौरान मनोज और नाबकुमार महतो गिरफ्तार हुआ। अभियान शनिवार को बंद हो गया। उन्होंने कहा कि मनोज और नाबकुमार दोनों ही संयुक्त बलों के लिए बहुत बडी गिरफ्तारियां हैं और हमें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हम कुछ और शीर्ष नेताओं को पकडने में कामयाब होंगे। वर्मा के अनुसार सात प्राथमिकियों में मनोज नामजद है और उसके खिलाफ राजद्रोह, हत्या, निषेधाज्ञा उल्लंघन समेत 15 मामले हैं। गिरफ्तारी के वक्त मनोज के पास से एक पिस्तौल और छह गोलियां बरामद हुईं। |