मुंबई । सोनिया गांधी के चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष बनने पर शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’में तीखी प्रतिक्रिया प्रकाशित करते हुए लिखा है कि लगता है कांग्रेस में एक भी मर्द नहीं है।
सामना में लिखा गया है कि एक समय था, जब कहा जाता था कि इंदिरा गांधी अपने मंत्रिमंडल में एकमात्र पुरुष हैं। अब सोनिया गांधी के समय में यह कहना पडेगा कि कांग्रेस में एक भी आदमी नहीं बचा है। लगता है कि कांग्रेस में एक भी आदमी नहीं है, अगर होता तो वो एक विदेशी महिला को अपना अध्यक्ष चुनकर अपने सम्मान का इस तरह आत्मसमर्पण नहीं करता।
इस तीखे लेख में कहा गया है कि यह वही कांग्रेस पार्टी है, जिसे एक विदेशी एओ ह्यूम ने बनाया था, लेकिन विदेशी होने की वजह से वे कभी पार्टी के अध्यक्ष नहीं बन सके थे। सामना लिखता है कि जब 1998 में शरद पवार, माखनलाल फोतेदार और भजनलाल जैसे नेताओं ने सीताराम केसरी को कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटाकर राजीव गांधी की विधवा सोनिया गांधी को अध्यक्ष बनाया था तो उन्होंने सोचा था कि वे सोनिया के सिर पर बंदूक रखकर उन्हें अपने इशारों पर चलाएंगे, लेकिन जब पार्टी सत्ता में आई तो सोनिया के विदेशी होने का मुद्दा उठाने पर इन्हीं नेताओं को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया और मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बना दिया गया। सामना गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए आगे लिखता है कि सोनिया गांधी का एकमात्र उद्देश्य अब अपने बेटे राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाना है। सोनिया के इस उद्देश्य को जानते हुए भी कांग्रेस पार्टी के सभी नेता चुप हैं और किसी की हिम्मत नहीं है कि वो इसके खिलाफ कुछ बोल सकें। लगता है पूरी कांग्रेस पार्टी ने ही सोनिया के सामने घुटने टेक दिए हैं और किसी में भी उनके सामने बोलने की हिम्मत नहीं है।
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