फिल्म ‘बाजीगर’ का बाबुलाल हो या छोटा छत्री, या फिर असलम भाई... अपने हर किरदार में उन्होंने दुनिया के उखडे चेहरों पर मुस्कान लाने में कोई कसर नहीं छोडी। साथ ही फिल्म ‘जुदाई’ का ‘अब्बा, चब्बा, डब्बा’ का डॉयलाग आज भी हमें हंसने की ठोस वजह देता है।
जब दर्शकों के पसंदीदा हास्य अभिनेता जॉनी लीवर तीन साल के लिए परदे से नदारद हो गए, तो लगा की स्वाभाविक हास्य पैदा करने वाला एक दौर थम गया हो। यह अतिश्योक्ति नहीं है कि जॉनी अपने अंग और ढंग से हास्य उत्पन्न करने की कला में माहिर हैं। वह किसी की नकल नहीं करते, बल्कि ईमानदारी की अदाकारी से ईमानदारी की हंसी दर्शकों को देते हैं।
14 अगस्त 1950 को आंध* प्रदेश में जन्मे जॉनी लीवर उन्हीं हास्य कलाकारों की महान परंपरा का हिस्सा हैं और अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा से नया योगदान दे रहे हैं। उन्होंने सुजाता से शादी की है और वह दो बच्चों के पिता हैं।
कैरियर का आगाज
अपने संघर्षमय शुरुआती दौर में जॉनी लीवर को फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ के साथ भारतीय सिनेमा में पहला ब्रेक मिला, और आज यह सिलसिला 350 से अधिक फिल्मों तक पहुंच गया। ‘दर्द का रिश्ता’के बाद वह ‘जलवा’ में नसीरुद्दीन शाह के साथ देखे गए, लेकिन उनकी पहली बडी सफलता ‘बाजीगर’ के साथ शुरू हुई। उसके बाद वह लगभग एक सहायक अभिनेता के रूप में हर फिल्म में हास्य अभिनेता के रोल में देखे गए। उनकी पहली फीचर फिल्म कभी तमिल ‘अनब्रिक्कु अल्लाविल्लाई’ है जो शेफर्ड भारत मीडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा इसी वर्ष जारी की । साथ ही जॉनी वर्ष 2007 में छोटे पर्दे के रियाल्टी शो में जज के रूप में भी दिखाई दिए।
जॉनी लीवर का असली नाम जॉनराव जनुमाला है। फिल्मों में कॉमेडी करने से पहले वह हिंदुस्तान लीवर के साथ काम कर रहे थे और यहीं से मिला उनको अपना नया नाम जॉनी लीवर। जनार्दन के लिए लीवर टाइटल इतना लकी रहा कि उन्होंने इसे हमेशा के लिए अपने नाम में शामिल कर लेने का फैसला कर लिया। आखिरकार नाम ने काम कर दिखाया और जनार्दन के जॉनी लीवर बनने के बाद सफलता उनके कदम चूमने लगी।
अवार्ड
1- 1997 ः सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता के लिए स्टार सीन अवार्ड (राजा हिंदुस्तानी)
2- 1998 ः फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता अवार्ड (दीवाना मस्ताना)
3- 1999 ः फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता अवार्ड (दूल्हे राजा)
4- 2002 ः सर्वश्रेष्ठ जी सिने अवार्ड (लव के लिए कुछ करेगा)
खास बात
**1998 में जॉनी लीवर को एक निजी समारोह में भारतीय राष्ट्रीय गान के अपमान के लिए सजा सुनाई गई थी।
** अपने बेटे की बीमारी के कारण जॉनी का कैरियर थम गया था। उस दौर को जॉनी अपने जीवन के कठिनतम दौरों में मानते हैं।
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