जबलपुर । पश्चिम मध्य रेलवे में फिर एक बार ग्रुप डी के पदों पर पूर्व में की गई भर्ती का मामला उछलने से हडकम्प की स्थिति है। बताया जाता है कि रेल प्रशासन इस मामले में सफाई दे-देकर परेशान है, पर विवाद है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।
पश्चिम मध्य रेलवे में वर्ष 2008 व 2009 में लगभग 370 ग्रुप डी (चतुर्थ श्रेणी) कर्मचारियों की नियुक्तियां की गई थीं, जिनमें बंगला प्यून अनुकम्पा नियुक्त व एक्ट अप्रेंटिसों शामिल हैं। उस नियुक्ति की किसी ने सीबीआई में शिकायत कर दी, जिसके बाद फरवरी 2010 में सीबीआई द्वारा रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को पत्र लिखकर इन भर्तियां के मामले में जानकारी मांगी। पमरे सूत्रों के मुताबिक रेलवे बोर्ड द्वारा सीबीआई के पत्र के आधार पर पमरे प्रशासन से भर्तियों के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा तो पमरे प्रशासन ने पूरी भर्ती प्रक्रिया सहित सभी जानकारी रेलवे बोर्ड को दे दी, जहां से बोर्ड ने सीबीआई को उक्त जानकारी भेज दी।
पुनः उखडा मामलाः पमरे प्रशासन ने उस मामले को समाप्त समझकर राहत की सांस ली,परंतु अब एक बार फिर वह मामला उखड गया है। अब की बार एक राष्टीय टीवी चैनल में पमरे में हुई भर्तियों के मामले को उजागर किया और सीबीआई प्रमुख द्वारा रेलवे बोर्ड के चेयरमैन को लिखे पत्र के आधार पर समाचार ब्रेक किया। उस समाचार के बाद से पमरे प्रशासन में हडकम्प की स्थिति है।
लालू यादव के राज में अधिक अनियमितताएंः रेल सूत्रों के मुताबिक तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में पूरे रेलवे में ग्रुप डी के पदों पर अंधाधुंध भर्तियां की गईं, जिनमें पमरे में भी काफी भर्तियां बिहार के युवकों हुई थी। खास बात यह थी कि उस समय जो भी पटना व दिल्ली से रेलमंत्री के पीए से नौकरी का पत्र लिखवाकर लाता, उसे यहां पर आसानी से नौकरी मिल जाती थी, जिससे स्थानीय बेरोजगारों में आक्रोश भी रहा। इस तरह की भर्तियों पर ममता बैनर्जी के रेलमंत्री बनते ही रोक लग गई और पूर्व में की गई भर्तियों की जांच भी कराई गई, लेकिन उस जांच का हश्र क्या हुआ, आज तक पता नहीं चल सका है। |