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नई दिल्ली। शीर्ष निशानेबाज भले ही सुविधाओं के अभाव और रेंज समय पर उपलब्ध नहीं होने से परेशान हों लेकिन विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज तेजस्विनी सावंत का मानना है कि इन बातों का असर राष्ट्रमंडल खेलों में प्रदर्शन पर कतई नहीं पडेगा।
सावंत ने कोल्हापुर से कहा कि अपनी रेंज पर खेलने से फर्क तो पडता है , लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह निर्णायक साबित होगा। ओलंपिक, विश्व चैंपियनशिप जैसे बडे टूर्नामेंटों में हमें एक या दो दिन की तैयारी में ही अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होता है।
उसने कहा कि यह जरूरी नहीं कि अभ्यास के लिए एक महीना पहले से रज मिले। किसी बडे टूर्नामेंट में ऐसा नहीं होता। हमें हालात के अनुरूप बहुत जल्दी ढलना पडता है। पिछले महीने म्युनिख में विश्व चैंपियनशिप में 50 मीटर राइफल प्रोन वर्ग में विश्व रिकार्ड की बराबरी करके स्वर्ण पदक जीतने वाली सावंत ने स्वीकार किया कि उन पर तीन से 14 अक्टूबर तक होने वाले दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में अपेक्षाओं का दबाव होगा लेकिन वह इसे तूल नहीं दे रही। सावंत ने यह भी कहा कि भारतीय निशानेबाजों का प्रदर्शन मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेल 2006 से बेहतर होगा। निश्चित तौर पर हम मेलबर्न से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। भारतीय निशानेबाजों का स्तर अब चार साल पहले की तुलना में बहुत अच्छा हो गया है।
इसके अलावा विश्व चैम्पियनशिप हाल ही में हुई है जिसमें भारतीयों को सराहा गया है। मेलबर्न में भारतीय निशानेबाजों ने 16 स्वर्ण, सात रजत और चार कांस्य पदक जीते थे। चयन ट्रायल की आलोचना करके राष्ट्रमंडल खेलों से पीछे हटने के ओलंपिक रजत पदक विजेता डबल ट्रैप निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौड के फैसले पर टिप्पणी से इंकार करते हुए सावंत ने कहा कि उन्हें अपने वर्ग के ट्रायल में कोई खामी नजर नहीं आई। |