| | सीएफएल से कमाए 2,000 करोड | | | |
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नई दिल्ली। एक पैसा बचाने का अर्थ है एक पैसा कमाना - इस कहावत को पैमाना बनाए तो केरल सरकार बिजली क्षेत्र में 100 करोड रुपए से कम खर्च से वह फायदा हासिल करने जा रही जो राज्य को 2000 करोड से अधिक के निवेश से हासिल होता। पूरे प्रदेश में बिजली की बचत करने वाले सीएफएल बल्ब लगाने के केरल सरकार के अभियान से ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि होने का अनुमान है और इसे केंद्रीय बिजली मंत्रालय के बिजली कार्यकुशलता ब्यूरो (बीईई) के अधिकारियों की सराहना मिल रही है। केरल में सीएफएल बल्ब लगाने की 95 करोड रुपए की प्रदेश व्यापी योजना से 520 मेगावाट बिजली बचत की उम्मीद है। बिजली की इस बचत को अगर उत्पादन क्षमता के हिसाब से देखें तो इस क्षमता के संयंत्र के लिए लगभग 2200 करोड रुपए के निवेश की जरूरत पडती है। केन्द्रीय बिजली मंत्रालय के बिजली कार्यकुशलता ब्यूरो (बीईई) महानिदेशक अजय माथुर ने बताया कि बीईई की बचत लैंप योजना के तहत पूरे केरल राज्य में 14 करोड सीएफएल बल्ब वितरित किए गए। परपंरागत बल्बों की जगह सीफएल बल्ब के इस्तेमाल से सालाना लगभग 520 मेगावाट बिजली बचत की उम्मीद है। केरल सरकार के ‘ऊर्ज प्रबंधन केन्द्र’ निदेशक केएम धरेशन उन्नीथन ने कहा कियोजना इस वर्ष मार्च में शुरू की गई और पिछले महीने ही समाप्त हुई है। इस पर 95 करोड रुपए का खर्च आया, 40 करोड रुपए राज्य सरकार ने दिए जबकि 55 करोड रुपए पावर ट्रेडिंग कारपोरेशन से 13. 5 फीसदी ब्याज पर लिए गए।
उन्नीथन ने दावा किया कि बिजली बचत के लिए सीएफएल बल्ब योजना पर अमल से केरल में इस बार बिजली की अधिकतम मांग वाले समय में भी कोई ‘लोड शेडिंग’ नहीं हुई। सरकारी आंकडों के अनुसार केरल के 90 लाख परिवारों में से ‘राज्य एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर’ ने इनमें से 70 लाख परिवारों को सीफएल बल्ब 15 रुपए प्रति बल्ब की कीमत पर वितरित किए। ऊर्ज संरक्षण कानून के तहत विभिन्न राज्यों में बिजली के बेहतर इस्तेमाल को बढावा देने के लिए ‘ऊर्जा प्रबंधन केन्द्र’ स्थापित किए जा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार ऊर्जा संरक्षण उपायों से देशभर में 25,000 मेगावाट बिजली की बचत की जा सकती है। ऊर्जा संरक्षण के लिए सरकार बचत लैंप योजना, स्टार रेटिंग कार्यक्रम, इमारतों को उूर्जा दक्ष बनाने जैसे कई कार्यक्रम चला रही है। कुछ महीने पहले ही सरकार ने ऊर्जा क्षमता विस्तार के राष्ट्रीय मिशन को मंजूरी दी है। गौरतलब है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर जारी वैश्विक चिंता के बीच भारत ने 2020 तक कार्बन उत्सर्जन में 2005 के स्तर से 20 से 25 फीसद कमी लाने की प्रतिबद्धता जताई है। इसी कडी में ऊर्जा संरक्षण उपायों पर जोर दिया जा रहा है। हरियाणा में यमुनानगर, महाराष्ट्र में पुणे और आंध*प्रदेश के विशाखापट्टनम शहरों में सीएफएल बल्ब लगाकर बिजली की बचत और कार्यकुशलता बढाने के प्रयास विभिन्न चरणों में हैं। देश में बिजली की आपूर्ति कम पड रही है। 10वीं पंचवर्षीय योजना में 41,000 मेगावाट अतिरिक्त विद्युत उत्पादन लक्ष्य के मुकाबले मात्र 21,200 मेगावाट उत्पादन ही हो पाया। 11वीं योजना में 78,577 मेगावाट अतिरिक्त उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था जिसे संशोधित कर 62,375 मेगावाट कर दिया गया। कुल मिलाकर देश में1,60,000 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता है जबकि खपत दिनप्रतिदिन बढती जा रही है। |
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