गड़बड़ा गया है प्रकृति का पारंपरिक चक्र*सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता निकाल दिया*भारत-चीन के बीच जंग असंभव*चेन्नई की घटना से सबक ले समाज*फिर बनाने होंगे 1953 जैसे हालात*सीबीआई जया के खिलाफ पहुंची सुप्रीम कोर्ट*पॉल हॉलीवुड वॉक ऑफ द फेम से सम्मान*शाहरूख से मिलने के लिए बेताब प्रशंसक*सबसे शक्तिशाली लेजर केंद्र बनाएगा रूस*पेरू में बाढ़ से 14 मरे, 22 प्रांतों में परिवहन ठप*
सीबीआई जया के खिलाफ पहुंची सुप्रीम कोर्ट
अभी तक भारत के लिए रहस्य बना है एडिलेड
ओडिशा में नक्सली हमला, BSF के चार अधिकारी शहीद
मंत्री ने अपने क्षेत्र में बंद कराई बिजली, रोका अखबार
मुख्यपृष्ठ राष्ट्रीय विश्व शहर  व्यापार खेल मनोरंजन शिक्षा सम्पादकीय क्लासिफाइड Appointment पत्रिकाएँ आज का पंचांग
सदा फलते-फूलते रहें नेता व अफसर
On 9/5/2010 9:14:38 PM

Change font size:A | A

Print

E-mail

Comments

Rating

Bookmark

इतिहास गवाह है कि हम किसी भी युग में सम्राटों, राजाओं, महाराजाधिराजों, बादशाहों, शहंशाहों और नवाबों के बगैर नहीं रहे। आज के युग में भी हम बिना नेताओं के नहीं रह सकते। यही हमारे शासक हैं। शासक सदा से सर्वगुण संपन्न माना गया है। सो, हमें नेताओं के सर्वगुण संपन्न होने पर शक नहीं करना चाहिए। इनमें गुणों का भंडार होते हुए भी एक अभाव यह है कि इन्हें शासन करना नहीं आता, बस। अधिकारी नाम का पवित्र, कर्तव्यनिष्ठ व समर्पित प्राणी इनकी सहायतार्थ उपलब्ध है। अंग्रेज भागे और भगाए भी गए। आजादी आई, मीठा फल लाई। किसी को एक मिला, किसी को टोकरे भर, तो किसी को ट्रक भर।

खबरदार जनसामान्य! अधिक फल प्राप्त महानुभावों को ईर्ष्या या कोप की दृष्टि से न देखा जाए। अपने मुकद्दर का सब पाते हैं। सुना नहीं, भगवान छप्पर फाडकर देता है। वह आजकल छत फाडकर दे रहा है। आप चुपचाप देखिए, खुश होइए और हो सके, तो सदा की तरह ताली बजाइए। जरा सोचिए, अधिकारी नहीं होते, तो शासक को कौन बताता कि फाइल पर हस्ताक्षर कहां करना है? नोटशीट किसे कहते हैं? फाइल कैसे बढाई और रोकी जाती है? शासक चाहता है कि बस ऐसा हो। कैसे हो, इसे तो कार्यान्वित अधिकारी ही करता है। यानी, बिना अधिकारी के पत्ता भी नहीं हिल सकता। वह दिव्यशक्ति रखता आया है और आगे भी रखेगा। इसीलिए उसको सरकहते हैं। सर का अर्थ यहां महाशयसे न लीजिए, बल्कि सिरसे लीजिए। सिर न हो, तो धड क्या करेगा? अतः हर स्थिति में अधिकारी के अधिकारों को जन्मसिद्ध मानकर उसकी गरिमा-महिमा को नमन करते रहिए।

किसी ने सच कहा है-सेवा करे, सो मेवा पाए। मैं उसे सफल अधिकारी ही नहीं मानता, जो अपनी कंचन कामिनी पत्नी के लिए दस हजार से कम की साडी न लाए, सौ-पचास तोला सोने से न लादे और आधा किलो हीरे-जवाहरातों से विभूषित न करे। हां, वे प्रशंसायोग्य हैं, जो इस साधारण उपक्रम के साथ मारवल और ग्रेनाइट से सजे बंगले-कोठियां भी बनवाते हैं। दो-तीन ट्रक सागोन या शीशम की लकडियों से दरवाजे बनवाते हैं। किसी-किसी के घर में सोना-जवाहरात रखने को जगह नहीं रहती, तो वे बैंक के लाकरों में ठूंसते हैं। अधिक प्रशंसनीय, बल्कि वंदनीय वे हैं, जिनके बडी संख्या में फार्म हाउस, कंपनियों व बडे प्रोजेक्टों में निवेश हैं और विदेशों तक में रसूख है। दावे से तो नहीं कह सकते, पर इतना जरूर है कि आ जाएं ब्रिटेन व अमेरिका के नेता और अधिकारी, तो इस क्षेत्र में भारत की ही मूंछ ऊंची रहेगी। अमेरिका के राष्ट्रपति आइजन हावर जिस जमाने में भारत आए थे और जब उन्हें पता लगा कि हमारे एक नेताजी की कुल संपत्ति तीन सौ करोड की है, तो वे भौचक्के रह गए थे। उन नेता की नाक का बाल कोई अधिकारी दस-बीस करोड में खेलता हो, तो क्या आश्चर्य? केरोसिन के लिए भटक रहे, अनाज के लिए तरस रहे, दवा के लिए रो रहे लोगों को चाहिए कि वे अपने लकडियों की तरह सूखे हाथ उठाकर नेताओं-अफसरों के फलने-फूलने की कामना करें।

-अहमद अली सिद्दीकी

Post Comments
More News
मैकाले के मानसपुत्रों के चंग...
ओप्रा क्या जानें लाल बत्ती ल...
किसानों की तकलीफ समझें सरकार...
प्रणबदा की नींद उड़ने का कार...
उत्तरप्रदेश के वोटरों ने कमा...
फिर बनाने होंगे 1953 जैसे हा...
चेन्नई की घटना से सबक ले समा...
भारत-चीन के बीच जंग असंभव...
सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्...
गड़बड़ा गया है प्रकृति का पा...
क्रांति की उपलब्धियों को खो ...
चल रहा आश्वासन बांटने का अभि...
नाम, नमक और निशान के मायने...
मालदीव में सैनिक शासन की आहट...
मंत्रियों को यह सजा तो पर्या...
 सम्पर्क करें  विज्ञापन दरें आपके सुझाव संस्थान
© Copyright of Rajexpess 2009,all right reserved.
Developed & Designed By: