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भोपाल। अस्पतालों में मरीज दहशत का दाम चुका रहे हैं। स्वाइन फ्लू के बढते जोर से चिकित्सक भी एक बुखार के मरीज को इतनी जांचें कराने के लिए लिख देते हैं कि दो दिन तक मरीज जांच ही कराता रहता है।
इन जांचों में मरीजों के एक से डेढ हजार रुपए खर्च तो हो ही जाते हैं , लेकिन मर्ज भी तब तक काफी बिगड जाता है। स्वाइन फ्लू, वायरल, मलेरिया, डेंगू सहित किसी भी बीमारी के लक्षण हों, मरीजों को चार-पांच जांचें तो कराना ही है, भल ही इन जांचों के उपकरण व मशीनें अस्पताल की पैथालॉजी में नहीं हों। बीमारी से लडने के साथ ही हर मरीजों को जांच से गुजरना पड रहा है। एक मरीज का इलाज में इतना पैसा खर्च नहीं होता है, जितना कि वह जांच के नाम पर खर्च कर चुका होता है। आखिर क्या है इन जांचों का राज? कई चिकित्सकों की निजी पैथालॉजी से कमीशनबाजी का सीधा अनुबंध है। इसलिए वह ज्यादातर ऐसी जांच मरीज से कराने के लिए लिख देते हैं, जो सरकारी अस्पतालों में संभव नहीं है। फिर इन पैथालॉजी लैब द्वारा मरीजों से मनचाही रकम वसूली जाती है। स्वास्थ्य विभाग की इस उदासीनता की वजह से निजी पैथालॉजी जांच के नाम पर जमकर चांदी काट रहे हैं। |