जोधपुर । मथुरादास माथुर अस्पताल के ट्रामा वार्ड में शनिवार रात हुए उपद्रव के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों व मेडिकल छात्रों को पुलिस द्वारा पीटने के विरोध में रविवार सुबह शहर के सभी सरकारी अस्पतालों सहित कई निजी अस्पतालों के डॉक्टर भी हडताल पर चले गए।
इनके समर्थन में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों के रेजिडेंट्स हडताल पर चले गए। डॉक्टरों के हडताल पर चले जाने से राजस्थान में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं और अब तक 15 बच्चों की इलाज के अभाव में मौत की खबर है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री एमादुद्दीन अहमद उर्फ दुरु मियां ने जांच के आदेश दे दिए हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि जोधपुर में हुई बच्चों की मौतों की जांच की जाएगी। स्वाइन फ्लू के बढते प्रकोप के कारण महामारी कानून लागू होने के बावजूद डॉक्टर हडताल पर हैं। डॉक्टरों के समर्थन में शहर के ज्यादातर जांच केंद्रों के संचालकों व दवा विक्रेताओं ने भी प्रतिष्ठान बंद रखे। इससे शहर में चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं।
शहर के तीनों बडे सरकारी अस्पतालों में शनिवार रात 12 बजे से सोमवार सुबह तक सात मरीजों और 15 नवजातों की मौत हो चुकी है। इनमें से ज्यादातर ने इलाज के अभाव में दम तोडा। काल का ग्रास बने मरीजों में से पांच एमजीएच व दो एमडीएम अस्पताल में भर्ती थे। इनमें एक स्वाइन फ्लू का संदिग्ध रोगी भी था। डॉक्टरों ने पिटाई के लिए जिम्मेदार पुलिस व प्रशासनिक अफसरों को बर्खास्त करने की मांग की है और इस कार्रवाई तक काम पर नहीं लौटने की घोषणा की है। इस बीच, शास्त्रीनगर पुलिस ने 33 लोगों को नामजद करते हुए करीब 175 रेजिडेंट व मेडिकल छात्रों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
एक दर्जन शिशुओं की हालत नाजुक
हडताल के चलते उम्मेद अस्पताल में भर्ती कई शिशुओं की जान पर बन आई है। सात नवजात दम तोड चुके हैं, एक दर्जन से अधिक शिशुओं की हालत नाजुक बनी हुई है। प्रशासन से बार-बार आग्रह करने के बाद रविवार शाम दो डॉक्टरों को यहां लगाया गया है। 700 मरीजों की देखभाल के लिए यहां महज तीन डॉक्टर हैं। |