नई दिल्ली। विशेषज्ञों की राय में भारत के प्रति बार-बार आपत्तिजनक रवैया अख्तियार करने वाले चीन के इरादे कतई नेक नहीं हैं और एशिया का नेतृत्व हडपने का मंसूबा पाल रहे बीजिंग की राह का सबसे बडा रोडा होने की वजह से ही भारत के प्रति उसका व्यवहार लगातार खराब होता जा रहा है।
नीति में बदलाव की जरूरत
जानकारों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के निवासियों को स्टेपल कर वीजा देने, भारतीय सेना की उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसवाल को अपने यहां का वीजा देने से इनकार करने और तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा से भारतीय नेतृत्व के घुलने-मिलने पर बार-बार नाराजगी जाहिर करने वाले चीन के प्रति भारत की नीति में आमूल-चूल बदलाव की जरूरत है।
अमेरिका से बचने की कवायद
रक्षा विशेषज्ञ भरत वर्मा ने कहा कि चीन वैश्विक स्तर पर एक बहुधु*वीय दुनिया चाहता है ताकि अमेरिका उस पर भारी न पड सके लेकिन एशिया में वह एकछत्र व्यवस्था का इच्छुक है। वह चाहता है कि ताकत सिर्फ उसके पास ही रहे। इसके लिए वह पाकिस्तान के कट्टरपंथियों और म्यामां के सैन्य प्रशासन समेत एशिया की सभी कट्टरवादी ताकतों को अपने साथ मिलाना चाहता है। उन्होंने बताया कि ऐसा करने का चीन का मकसद दूसरे कट्टरवादियों के साथ मिलकर एशिया का नेतृत्व हडपना है। अगर वह अपने मंसूबों में कामयाब रहा तो एशिया में लोकतंत्र धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। चूंकि उसकी राह में भारत सबसे बडा रोडा है लिहाजा वह हिन्दुस्तान को निशाना बना रहा है।
नेपाल पर भारत की नजर
नई दिल्ली। नेपाल में प्रधानमंत्री चुने जाने की प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से चीन द्वारा धन बल का इस्तेमाल किए जाने की रिपोर्ट पर भारत अपनी नजरे गडाए हुए है। नेपाली माओवादी नेताओं के सांसदों को खरीदने के लिए एक चीनी ‘मित्र’ से धन लेने के आरोपों के बीच सूत्रों ने कहा कि भारत इस खबर पूरी तरह से नजर रखे हुए है। इससे पहले एक लेख में शनिवार को आरोप लगाया गया था कि माओवादियों ने सांसदों को खरीदने के लिए चीन से 50 करोड रूपए की मदद मांगी है ताकि उनका प्रधानमंत्री बन सके। मीडिया में लीक हुई एक टेलीफोन बातचीत में एकीकृत सीपीएन माओवादी के विदेश विभाग के प्रमुख कृष्ण बहादुर महारा को एक अज्ञात चीनी अधिकारी से 50 करोड मांगते हुए सुना गया है। |