भोपाल । विक्रम पुरस्कार विजेता खिलाडी प्रदेश सरकार से खफा हैं, उन्होंने कहा कि अगर आठ दिन के अंदर प्रदेश के मुखिया ने खिलाडियों से संफ नहीं किया तो वे अपना अवार्ड सरकार को वापस करेंगे। साथ ही धरना प्रदर्शन भी करेंगे। खिलाडियों ने रविवार को राजधानी स्थित रवींद्र भवन में प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान अपनी पीडा जाहिर करते हुए कहा कि हम विभागों के चक्कर काटते-काटते थक चुके हैं। अब इसके अलावा हमारे पास अन्य कोई रास्ता नहीं बचा है। उम्रदराज पदाधिकारियों ने कहा कि खिलाडियों के साथ हो रहे इस भेदभाव में हम आखिर तक खिलाडियों की भलाई के लिए लडेंगे। 1997 से लेकर 2006 तक के विक्रम पुरस्कार विजेता 34 खिलाडियों को अभी तक प्रदेश सरकार ने नौकरी से वंचित रखा है।
जबकि 2007 से और इससे पहले विक्रम पुरस्कार विजेताओं को नौकरी दी गई। विक्रम अवार्डी छाया और सुरिंदर कौर के साथ मौजूद खिलाडियों ने कहा कि हमें कई बार खेल मंत्री और खेल संचालक संजय चौधरी द्वारा आश्वासन दिए गए, लेकिन आज तक परिणाम सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा अब तो खेल मंत्री तुकोजीराव पवार ने कह दिया है कि आपने कांगे*स सरकार में पदक जीत थे तो तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह ही आपको नौकरी देंगे। जबकि खेल संचालक ने कहा कि तुम्हारे लिए कोई नौकरी नहीं है। उन्होंने कहा कि आठ दिन के अंदर अगर प्रदेश के किसी नुमाइंदे ने हमसे संफ किया तो ठीक है वरना हम अपना अवार्ड प्रदेश सरकार को वापस करेंगे तथा विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य हगे।
कोर्ट की अवमानना
खिलाडियों ने एक दस्तावेज में बताया कि 1994 की नीति में हम नौकरी की पात्रता रखते है। जबकि नई नीति 2005 से बनाई गई है। खिलाडियों ने कहा जबकि खेल विभाग इसे नियम विरू द्ध बता रहा है। जिससे न्यायालय की अवमानना हो रही है। |