वैसे तो बॉलीवुड के मि. परफेक्शनिस्ट आमिर खान के लिए कोई भी काम मुश्किल नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि किसी भी फिल्म का रिमेक बनाना बडा ही कठिन काम है। सूत्रों के अनुसार आमिर ने कहा, ‘मूल फिल्म के किरदारों के भावों को रिमेक में ठीक उसी तरह नहीं उतारा जा सकता है। लिहाजा रिमेक फिल्में बनाना भावनात्मक रूप से बेहद कठिन होता है। जब भी आप दोनों की तुलना करेंगे, रिमेक में मूल फिल्म जैसे भाव नजर नहीं आएंगे।’ उन्होंने बताया, ‘मैंने फिल्म ‘गजनी’ के रिमेक में काम किया है, जो तमिल में बनी थी। हमने उसे हिन्दी में दोबारा बनाया, लेकिन वह पुरानी फिल्म की तरह नहीं बन पाई। वर्ष 1934 में हॉलीवुड निर्देशक फ्रैंक काप्रा ने ‘इट हैपेंड वन नाइट’ बनाई थी। मैंने पटकथाओं के संग्रह से उसे निकालकर पढा था। मुझे पसंद आ गई और हमने उसे दोबारा हिन्दी में बनाने का फैसला किया था।’ साथ ही उन्होंने यह भी खुलासा किया कि वर्ष 1991 में आई उनकी फिल्म ‘दिल है कि मानता नहीं’ हॉलीवुड फिल्म ‘इट हैपेंड वन नाइट’(1934) की रिमेक थी। |